राहुल चावला, धर्मशाला: जहां आज की युवा पीढ़ी खेतीबाड़ी के व्यवसाय को न अपना कर सरकारी नौकरी की तरफ दौड़ रही हैं। वहीं कुछ लोग पढ़ा-लिखा होने के बावजूद भी स्वरोजगार को अपना कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन कर नई मिसाल पेश कर रहे हैं। ऐसी ही एक मिसाल पेश की हैं पढ़े-लिखे युवा सुनील दत्त ने। बचपन से ही कृषि वैज्ञानिक बनने की इच्छा रखने वाले सुनील दत्त वैज्ञानिक बनकर गरीब किसानों के दर्द को समझते हुए उनकी मदद करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी (सोलन) से बीएससी ओर एमएससी (औद्यानिकी) की डिग्री भी हासिल की। इसके बाद सुनील दत्त ने वर्ष 2006 में चंडीगढ़ में एग्रो डच इंडस्ट्रीज लिमिटेड में बतौर प्रबंधक अपनी सेवाएं आरंभ की।
सुनील वहां सेवाएं तो दे रहे थे लेकिन उन्होंने कृषि क्षेत्र में मिल रहे सवर्णिम अवसरों का फायदा उठाने का मन बनाया। उन्होंने मशरूम का कारोबार करने का मन बनाया और वर्ष 2012 में नगरोटा सूरियां विकास खंड के तहत अनुही गांव में 12 कनाल भूमि खरीदी, लेकिन आर्थिक स्थिति राह में बाधा बन रही थी। उन्होंने इसके लिए बागवानी विभाग से संपर्क कर केंद्र प्रायोजित एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत वर्ष 2016 में बैंक से एक करोड़ रुपए का ऋण लेकर धौलाधार मशरुम फार्म खोल कर कारोबार शुरू किया, जिसके लिए उन्हें प्रदेश के बागवानी विभाग की ओर वे 22 लाख रुपए का अनुदान प्रदान किया गया।
इस राशि से उन्होंने अनुही में मशरुम ओर खाद तैयार करने की इकाई स्थापित की हैं। कड़ी मेहनत के बल पर आज सुनील निरंतर ऊंचाईयों छू रहे हैं और अपने प्लांट में प्रतिदिन 5 क्विंटल तक मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। जिसे वह सीमांत राज्य जम्मू, पंजाब ओर प्रदेश के अन्य स्थानों में बेच कर अच्छे दाम प्राप्त कर रहे हैं। वह अपने मशरूम यूनिट में 25 स्थानीय महिला एवं पुरुषों को भी रोजगार उपलब्ध करवा रहे हैं ।
सुनील दत्त का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी नौकरियों के पीछे ना भागकर कृषि के क्षेत्र में भी कार्य करा अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं। इसमें बेहतर कमाई के साथ ही युवा दूसरे लोगों को रोजगार उपलब्ध करवा सकते हैं। मसरूम की खेती करके ही सालाना लाखों करोड़ो की कमाई कर रहें हैं।
प्रतिवर्ष हो रही दो करोड़ ओर खाद से हो रही 35 से 40 लाख की कमाई
सुनील अपने मशरूम प्लांट में प्रतिवर्ष दो करोड रुपए के मशरूम ओर खाद का कारोबार कर 35 से 40 लाख रुपए की सालाना कमाई कर रहे हैं। मशरुम उत्पादन से उन्होंने समाज में एक अलग पहचान बनाई हैं।
