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Reading: हमीरपुर के मसयाणा जंगल में अवैध ब्लास्टिंग और भारी डंपिंग से डरे स्थानीय लोग
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हमीरपुर के मसयाणा जंगल में अवैध ब्लास्टिंग और भारी डंपिंग से डरे स्थानीय लोग

Chandrika
Chandrika 3 Min Read
Updated 2025/07/18 at 4:09 PM
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Hamirpur, Arvind-हमीरपुर ज़िले के शिमला-मटौर फोरलेन परियोजना के तहत चीलबाहल-कोहली टूलेन पैच पर मसयाणा जंगल में चल रहे अवैध निर्माण कार्य ने पर्यावरणीय संकट को जन्म दे दिया है। वन विभाग की जानकारी में आए इस मामले में मौके पर निरीक्षण किया गया, जहां पहाड़ी को 90 डिग्री की सीध में काटा गया है और कुणाह खड्ड में भारी डंपिंग की गई है, जिससे खड्ड का प्राकृतिक बहाव कई स्थानों पर अवरुद्ध हो गया है।

वन विभाग ने इस गंभीर उल्लंघन पर डैमेज रिपोर्ट (डीआर) काटी है, लेकिन एनएचएआई और निर्माण कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी मौके से नदारद रहे। केवल सुपरवाइजर और मजदूर ही मौजूद पाए गए। कंपनी के कर्मचारियों ने ब्लास्टिंग की अनुमति होने का दावा किया, जबकि वन विभाग ने इससे अनभिज्ञता जाहिर की।

लगातार हो रही ब्लास्टिंग से स्थानीय लोग डरे

स्थानीय लोग लगातार हो रही ब्लास्टिंग से भयभीत हैं। लोगों का कहना है कि मसयाणा जंगल की पहाड़ी थर्राने लगी है और बरसात के पानी से मसयाणा चौक के पास गहरी झील बन गई है। पहाड़ी से निकले मलबे को सीधे कुणाह खड्ड में फेंका जा रहा है, जिससे जलनिकासी प्रभावित हुई है। खड्ड में बनाए जा रहे पुल के निर्माण के लिए भी मलबा डाला गया है, जिससे जलप्रवाह रुक गया है। पाइप डालकर बहाव बहाल करने का प्रयास किया गया, लेकिन बरसात में पानी का भराव हो गया है।स्थानीय लोगों, जैसे अशोक कुमार और विजय शर्मा, ने प्रशासन और एनएचएआई की उदासीनता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मलबा दुकानों में घुस गया है, और जंगल के सैकड़ों पेड़ नष्ट हो गए हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत की गई, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला।

वन विभाग का ये कहना

वन विभाग ने बताया कि इससे पहले भी इस क्षेत्र में डंपिंग को लेकर डैमेज रिपोर्ट काटी जा चुकी है, और अब पुनः ऐसा किया जा रहा है। खड्ड के किनारे लगाई गई क्रेटवाल भी अपर्याप्त पाई गई है।गौरतलब है कि मसयाणा जंगल और कुणाह खड्ड क्षेत्र में हो रहा यह निर्माण कार्य न केवल पर्यावरणीय विनाश की ओर इशारा कर रहा है, बल्कि जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

TAGGED: Hamirpur Masyana forest
Chandrika July 18, 2025
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