संजु चौधरी, शिमला: बीती मंगलवार रात हिमाचल प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस किए गए। इन भूकंप के झटकों की तीव्रता काफी ज्यादा मापी गई हैं,जिसके चलते अब नगर निगम शिमला कि नींद भी खुल गई हैं। भूकंप के बाद नगर निगम शिमला भी अलर्ट हो गया हैं। शिमला शहर में जो भवन जर्जर है हो गए हैं और डेंजर जोन में आते हैं उन्हें खाली करवाने की मुहिम अब नगर निगम ने छेड़ दी हैं। शिमला भूंकप के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं और यहां अधिकतर इमारतें भूकंप रोधी नहीं हैं। अगर कोई बड़ा भूकंप आता है तो जान-माल की भारी क्षति हो सकती हैं। इसी से बचने के लिए नगर निगम की ओर से यह कदम उठाया जा रहा हैं।
नगर निगम के आर्किटेक्ट प्लानर मेहबूब शेख ने बताया कि शिमला में कई भवन हैं जिन्हें खाली करने का नोटिस दिया गया हैं। बावजूद इसके अभी तक इन्हें खाली नहीं किया गया हैं। निगम प्रशासन अब इन मकान मालिकों के खिलाफ सख्ती से पेश आएगा। उन्होंने कहा कि 2 दिन पहले शहर में भूकंप के झटकों ने यह साबित कर दिया है कि यह स्थिति दोबारा से बनेगी।
उन्होंने कहा कि शिमला के दो सिंकिंग जोन में रिज, ग्रैंड होटल, लक्कड़ बाजार, सेंट्रल स्कूल, ऑकलैंड नर्सरी स्कूल, धोबीघाट, कृष्णानगर और होटल क्लार्क्स के आसपास के इलाके शामिल हैं। जहां पर कोई नई बिल्डिंग बनाना खुद विनाश को न्यौता देना हैं।
बता दें कि 25,000 की आबादी के लिए स्थापित शिमला शहर में अब 2.3 लाख लोगों के रहने का अनुमान हैं। इमारतों को बनाने के लिए 70 डिग्री तक की ढलानों पर अनुमति दी गई हैं। शिमला भूकंपीय क्षेत्र IV में है। भूकंप के सबसे खतरनाक जोन में होने के बाद भी यहां लापरवाही जारी हैं। स्थिति को ध्यान में रखते हुए, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 2017 में शिमला के मुख्य और हरित क्षेत्रों में बिल्डिंग बनाने समेत सभी तरह के निर्माण पर प्रतिबंध लगाया था।
