संजीव महाजन,नूरपुर: सावन का महीना शिव भोलेनाथ का प्रिय महीना माना जाता है और इस दौरान शिव भोलेनाथ की पूजा अर्चना अनेक मनोरथों को पूर्ण करने वाली मानी गई हैं। वहीं अगर बात हिमाचल की कि जाए तो हिमाचल में आज से सावन मास की शुरुवात हुई हैं। इस संयोग से 47 सालों बाद अमावस्या सोमवार बार आई है इसलिए इस सोमवार का ओर महत्व बना हुआ और आज सोमवती अमावस्या के दौरान नूरपूर विधानसभा के गांव सुलयाली के प्रसिद्ध प्राचीन डिब्केशवर महादेव शिव मंदिर में शिव भोलेनाथ के भक्तों का तांता लगा रहा।
यहां मंदिर में शिव भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने का सिलसिला सुबह ही शुरू हो गया था। इस प्राकृतिक प्रसिद्ध प्राचीन डिब्केशवर महादेव शिव मंदिर में स्थानीय गांव वासियों के साथ-साथ हिमाचल के दूर दराज के क्षेत्रों के साथ ही पंजाब से श्रद्धालु पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं। मान्यता के अनुसार सावन के इस दिन भगवान शिव की विधि- विधान से जो पूजा अर्चना व व्रत रखता है भगवान शिव भोलेनाथ उसके सभी कष्टों को मिटा देते हैं।
श्रद्धालु ने कहा कि सुलयाली में यह एक बहुत प्राचीन प्रसिद्ध शिव का मंदिर हैं। यहां बहुत दूर दूर से लोग आते हैं। आज सोमवती अमावस्या हैं लोग पीपल की 108 परिक्रमा भी लेते हैं और फल, विल पत्री भगवान शिव को अर्पित करते हैं। कुछ श्रद्धालुओं ने कहा कि वह डिब्केशवर महादेव शिव मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने आए हैं। सावन के माह में इसकी बहुत मान्यता हैं।
यह हैं प्राचीन डिब्केशवर महादेव शिव मंदिर का इतिहास
नूरपुर के सुलयाली स्थित प्राचीन डिब्केशवर महादेव शिव मंदिर पूरे हिमाचल में प्रसिद्ध हैं। सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पर स्वयंभू शिवलिंग पिंडियों के रुप में विराजमान हैं जो भारतवर्ष में कुछ ही शिव मंदिरों में विराजमान हैं। इस मंदिर में भगवान शिव के छोटे-छोटे स्वयंभू शिवलिंग स्थापित हैं। इतना ही नहीं प्राकृतिक तरीके से इन शिवलिंगों पर लगातार जलाभिषेक यहां गुफाओं से निकलने वाले पानी से होता रहता हैं।
डिब्केशवर महादेव के स्नान कुंड में डुबकी लगाने भर से मिट जाते हैं सब पाप
डिब्केशवर महादेव मंदिर के नीचे एक स्नान कुंड बना हुआ हैं। मान्यता है कि इस स्नान कुंड में डुबकी लगाने भर से ही सब पाप मिट जाते हैं। वहीं त्वचा से जुड़े रोग भी इस पानी में नहाने से दूर होते हैं। यहां तीन बार स्नान करके से मणिमेहश का एक बार स्नान का पुण्य भक्तों को प्राप्त होता हैं।
