संजु चौधरी,शिमला : शिमला के भट्ठाकुफर स्थित शिमला नर्सिंग कॉलेज में गुरुवार को अंगदान महोत्सव के चलते स्टेट ऑर्गेन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) की ओर से अंगदान के विषय पर जागरुकता कार्यक्रम आयोजित हुआ । इसमें कॉलेज की 74 छात्राओं ने शपथ पत्र भरकर अंगदान करने का प्रण लिया । कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ. कृष्णा चौहान ने छात्राओं को अंगदान शपथ पत्र भरने के लिए प्रेरित किया।
सोटो के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नरेश कुमार ने छात्राओं को अंगदान संबंधी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सोटो संस्था समाज में अंगदान के प्रति लोगों को जागरुक करने का काम कर रही हैं। अंगदान जरूरत मंद के लिए वरदान साबित हो सकता हैं। ब्रेन डेड की स्थिति में अंगदान करने वाला व्यक्ति ऑर्गन के जरिए 8 लोगों का जीवन बचा सकता हैं। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के ब्रेन डेड होने के बाद यह प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। अस्पताल में मरीज को निगरानी में रखा जाता है और विशेष कमेटी मरीज को ब्रेन डेड घोषित करती हैं। मृतक के अंग लेने के लिए पारिवारिक जनों की सहमति बेहद जरूरी रहती हैं।
उन्होंने बताया कि देश भर में प्रतिदिन 6 हज़ार मरीज समय पर ऑर्गन ना मिलने के कारण मरते हैं जोकि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। लोगों में भ्रांति रहती है कि अंगदान करने के बाद अंगों को बेच दिया जाता है या फिर तस्करी की जाती हैं। ट्रांसप्लांट ऑफ ह्यूमन एक्ट 1994 जीवित दाता एवं ब्रेन डेड डोनर को अंगदान करने की स्वीकृति प्रदान करता हैं। यह अधिनियम चिकित्सीय प्रयोजनों के लिए अंगों को निकालने , भंडारण करने और प्रत्यारोपण को नियंत्रित कर मानव अंगों को तस्करी से बचाता है। कोई भी व्यक्ति अंग को खरीद या बेच नहीं सकते हैं।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सोटो हिमाचल की इस मुहिम को आगे बढ़ाने में सहयोग करें ताकि जरूरतमंद मरीजों का जीवन समय रहते बचाया जा सके। अंगदान करने के लिए लोग अपनी इच्छा जाहिर करें और अपने रिश्तेदारों को भी इस पुनीत कार्य में जोड़ें। कार्यक्रम में करीब 80 छात्राओं ने भाग लिया । इस दौरान सोटो की प्रोग्राम असिस्टेंट भारती कश्यप मौजूद रही।
क्या है ब्रेन स्टेम डेथ
ब्रेन जीवन को बनाए रखने के लिए मस्तिष्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ब्रेन डेड व्यक्ति स्वयं सांस नहीं ले सकता सांस लेने के लिए वह वेंटिलेटर पर निर्भर होता है हालांकि उसकी नब्ज, रक्तचाप व जीवन के अन्य लक्षण महसूस किए जा सकते हैं। ब्रेन का कार्य ना करना मृत्यु का लक्षण है, मस्तिष्क में क्षति पहुंचने का कारण ऐसी स्थिति होती हैं। इस प्रकार के रोगी को ब्रेन डेड घोषित किया जाता हैं। कोमा रोगियों और ब्रेन डेड रोगियों के बीच अंतर हैं। कोमा में मरीज मृत नहीं होता जबकि ब्रेनडेड व्यक्ति की स्थिति इससे अलग हैं । इसमें व्यक्ति चेतना और सांस लेने की क्षमता हासिल नहीं कर पाता हैं। ह्रदय कुछ घंटों या कुछ दिनों के लिए वेंटिलेटर की वजह से कार्य कर सकता हैं। इस अवधि के दौरान करीबी रिश्तेदारों की सहमति से अंग लिए जा सकते हैं।
