शिमला : कमल भारद्वाज – कोरोना काल के दौरान करीबन चार साल पहले अस्पतालों में आउटसोर्स के माध्यम से भिन्न भिन्न पदों पर नियुक्तियां की गई थी, लेकिन इन कर्मियों के लिए आज तक कोई स्थायी नीति नही बन पाई है ।
शिमला के क्षेत्रीय दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल की बात करें तो यहां भी कई पदों पर नियुक्तियां हुई थी, लेकिन चार सालों में इनके लिए कोई स्थायी नीति नही बन पाई है । हर तीन महीने बाद टेंडर को रिन्यू किया जाता है, जिससे इन कर्मियों को अपनी नौकरी की चिंता सताने लगती है । स्थाई नीति की मांग को लेकर दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के कर्मचारी सचिवालय में मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे, लेकिन मुख्यमंत्री के सचिवालय में न होने के कारण ये कर्मी मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान से मिले । इन कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में सेवाएं दे रहे है और इनकी नियुक्तियां कोरोना काल के दौरान हुई थी,मगर आज तक उनके लिए कोई स्थाई नीति नही बन पाई है । उन्होंने कहा कि वे प्रधान मीडिया सलाहकार से इस मामले को लेकर मिले हैं और उन्होंने हर संभव सहायता करने का आश्वासन दिया है।
