हिमाचल (एकता): जैसे-जैसे हिमाचल में चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे ही पुरानी पेंशन योजना पर राजनीति गर्माती ही जा रही है। आपको बताते हैं कि नई पेंशन और पुरानी पेंशन योजना में क्या फर्क है। दरअसल कई राज्यों में कर्मचारी काफी समय से पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने और नई पेंशन योजना को बंद करने की मांग कर रहे हैं। इसे बहाल करने के लिए अब तो लोग सड़कों पर ही उतर आए हैं।
नई और पुरानी पेंशन योजना में जानिए क्या है फर्क
बता दें कि नई पेंशन योजना के तहत कर्मचारी के मूल वेतन से 10 प्रतिशत राशि काटी जाती है और उसमें सरकार 14 फीसदी अपना हिस्सा डालती है। पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों की सैलरी से किसी तरह की कटौती नहीं होती। पुरानी पेंशन बहाली और एनपीएस खत्म करने को लेकर केंद्रीय कर्मचारी संगठनों का आंदोलन तेज हो रहा है।
जानिए पुरानी पेंशन योजना के लाभ
पुरानी पेंशन योजना के बहुत से फायदे हैं। जिन कर्मियों की न्यूनतम 10 साल की क्वालिफाइंग सर्विस होती है उन्हें अंतिम आहरित वेतन का 50 प्रतिशत मासिक पेंशन के रूप में दिया जाता है। कम्युटेशन के पश्चात शेष पेंशन और पूर्ण पेंशन पर महंगाई भत्ते का, 15 साल तक भुगतान किया जाता है। अगर 15 साल से पहले पेंशनभोगी की मौत हो जाती है तो शेष परिवर्तित पेंशन के पुनर्भुगतान की कोई आवश्यकता नहीं होती। इतना ही नहीं 80 साल की उम्र के बाद भी पेंशनधारक को 20 फीसदी बढ़ोतरी का लाभ मिलता है।
एनपीएस योजना में जानिए क्या है कमी?
एनपीएस योजना में वास्तविक वेतन और महंगाई भत्ते का 10 फीसदी का योगदान देना होता है। सरकार भी अपनी ग्रांट के रूप में समान धनराशि का योगदान करती है। 15 फीसदी के बराबर की धनराशि को शेयर मार्केट में तथा 85 फीसदी के बराबर की धनराशि को सरकारी एवं निजी बांड में निवेश करते हैं। हालांकि एनपीएस योजना में निवेश के ऊपर रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। इसमें मूल धनराशि में भी नुकसान उठाना पड़ता है।
हिमाचल से किया पुरानी पेंशन बहाली का वादा
हिमाचल प्रदेश में इसी वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव है और राजनीतिक दल पूरी तरह से चुनाव प्रचार करने में जुटे हुए हैं। वहीं कांग्रेस ने चुनाव से पहले एक बड़ा वादा कर दिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि अगर हिमाचल प्रदेश और गुजरात में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो दोनों राज्यों में पुरानी पेंशन योजना फिर से लागू की जाएगी।
