राकेश , ऊना | ऊना में निजी बस ऑपरेटरों ने हिमाचल एंट्री टैक्स और अंतरराज्यीय रूटों पर वसूले जा रहे शुल्क को लेकर नाराजगी जताते हुए हिमाचल सरकार से इस मुद्दे को पंजाब सरकार के समक्ष उठाने की मांग की है। निजी बस ऑपरेटर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी समस्याएं मीडिया के सामने रखीं और इसे अन्यायपूर्ण बताया।
ऑपरेटरों का कहना है कि कॉरिडोर रूट पर चलने वाली उनकी बसें ऐसे मार्गों से गुजरती हैं, जहां कुछ हिस्सा पंजाब और कुछ हिमाचल में आता है। ऐसे में केवल हिमाचल एंट्री टैक्स वसूला जाना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि बसें पंजाब से होकर दोबारा हिमाचल में प्रवेश करती हैं, इसलिए इस पर दोहरी टैक्स व्यवस्था लागू करना गलत है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि नांगल तक जाने वाली बसों पर करीब 3200 रुपये टैक्स लिया जाता है, जबकि पंजाब की निजी बसें जब हिमाचल में धार्मिक स्थलों तक आती हैं, तो उनसे लगभग 1550 रुपये टैक्स लिया जाता है। ऑपरेटरों ने सवाल उठाया कि जब किराया दोनों तरफ समान है, तो टैक्स में इतना अंतर क्यों है।
इसके अलावा, स्टेट कैरिज बसों के संचालन को लेकर भी ऑपरेटरों ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ रूटों जैसे आनंदपुर-तलवाड़ा आदि पर चलने वाली बसों पर पंजाब में लगभग 6 रुपये प्रति किलोमीटर टैक्स लिया जाता है, जबकि किराया उनकी बसों के बराबर ही है। उन्होंने यह भी बताया कि हिमाचल की सरकारी बसों पर भी पंजाब में समान दर से टैक्स लगाया जाता है।
निजी बस ऑपरेटरों ने हिमाचल सरकार से आग्रह किया है कि वह इस मुद्दे को पंजाब सरकार के साथ उठाए और टैक्स व्यवस्था में सुधार कर राहत प्रदान करे। उन्होंने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि राज्य के निजी ट्रांसपोर्टरों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
