राहुल चावला,धर्मशाला: जिला कांगड़ा के आठ विकास खंडों ढाई सौ ग्राम पंचायतों नए गांव में विकास कार्यों को अंजाम नहीं दिया हैं। यहां विकास कार्यों में कोताही बरती गई हैं, जिसका परिणाम अब इन ग्राम पंचायतों के प्रधानों को भुगतना पड़ रहा हैं। विकास कार्य में कोताही बरतने को लेकर इन 28 पंचायतों के प्रधानों को उपायुक्त कांगड़ा की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उपायुक्त ने इन पंचायतों की ओर से 15वें वित्त आयोग में साल 2021-22 और 2022-23 तक विकास कार्यों के लिए स्वीकृत धनराशि को व्यय न करने पर यह कार्रवाई की है।
प्रधानों को 15 दिनों के भीतर नोटिस का जवाब देने के लिए कहा गया है। तय अवधि में उत्तर न देने वालों पर हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1994 के तहत नियमानुसार आगामी कार्रवाई की बात कही गई है।
उपायुक्त डॉ. निपुण जिंदल ने बताया कि खंड विकास अधिकारियों के साथ धर्मशाला में एक-दो दिन पीछे हुई समीक्षा बैठक में यह पुष्टि हुई कि जिले की 28 ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त आयोग में साल 2021-22 और 2022-23 तक विकास कार्यों के लिए स्वीकृत धनराशि को व्यय नहीं किया गया हैं। इसकी ऑनलाईन रिपोर्ट भी शून्य दर्शायी गई हैं। इससे यह पता चलता है कि इन ग्राम पंचायतों की ओर से विकासात्मक कार्यों के निष्पादन में कोताही बरती जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकारी धन का जन विकास के कामों में सदुपयोग न करने की प्रवृति ठीक नहीं है। इस प्रकार की कोताही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उपायुक्त ने बताया कि संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रधानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में अपने खंड विकास अधिकारी के माध्यम से उपायुक्त कार्यालय को जवाब प्रस्ततु करने के लिए कहा गया हैं। ऐसा न करने वालों पर आगे नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
