उपायुक्त ने सभी पटवारियों और पंचायत सचिवों को मानसून अवधि में अपने-अपने मुख्यालयों में उपस्थित रहने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि वे क्षेत्र के ग्राम प्रधानों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखें और किसी भी आपदा या समस्या की स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें।उन्होंने खंड विकास अधिकारी को स्वयंसेवकों की सूची उपमंडल दंडाधिकारी और उप-पुलिस अधीक्षक के साथ साझा करने के निर्देश दिए ताकि आपदा की स्थिति में राहत कार्यों में उनका सहयोग लिया जा सके। खंड चिकित्सा अधिकारी को सभी सरकारी और निजी एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक नोडल अधिकारी नामित करने को कहा गया, जो एंबुलेंस चालकों से सतत संपर्क बनाए रखेंगे।
लोक निर्माण, जल शक्ति और विद्युत विभाग के अधिकारियों को आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति और किसी भी आपदा की स्थिति में उन्हें शीघ्र बहाल करने के निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि सभी विभाग संवेदनशील स्थानों के समीप अपनी मशीनरी तैयार रखें।बैठक में उपमंडल दंडाधिकारी ठियोग डॉ. मेजर शशांक गुप्ता, उप-पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ शर्मा, खंड विकास अधिकारी जगदीप सहित विभिन्न विभागों के उपमंडल स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
आपदा प्रबंधन उपकरणों की समीक्षा और वैकल्पिक पुल का निरीक्षण
बैठक के पश्चात, उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने पराला स्थित होमगार्ड प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण किया तथा वहाँ रखे गए आपदा प्रबंधन उपकरणों की स्थिति की समीक्षा की। सभी उपकरण कार्यशील स्थिति में पाए गए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त उपकरण भी शीघ्र उपलब्ध करवाए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त, अधिकारियों ने महिपुल के क्षतिग्रस्त पुल तथा लोक निर्माण विभाग द्वारा 15 दिन में निर्मित वैकल्पिक पुल का निरीक्षण किया। उपायुक्त ने विभाग को तीव्र गति से कार्य पूरा करने पर बधाई दी और क्षेत्रवासियों को बेहतर संपर्क सुविधा उपलब्ध करवाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
