शिमला,संजु चौधरी(TSN)-हिमाचल प्रदेश के बागवानी विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को निकाले जाने के फैसले के खिलाफ जोरदार विरोध हो रहा है।कर्मचारियों की यूनियन के लीडर अनिल ठाकुर ने इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वर्षों से कम सैलरी में काम कर रहे कर्मचारियों को अचानक बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, जबकि विधायकों और मंत्रियों की सैलरी लगातार बढ़ाई जा रही है।
कर्मचारियों का दर्द और सरकार की बेरुखी
अनिल ठाकुर ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारी महज 5,000-6,000 रुपये की मामूली सैलरी पर काम कर रहे थे,फिर भी उन्हें निकाल दिया गया।उन्होंने कहा,”हम लोगों को कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने लॉलीपॉप दिया है,लेकिन हमारी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।मंत्री जगत सिंह से कई बार गुहार लगाई,मगर उन्होंने कभी हमारी बात नहीं सुनी।”
पुराने वादे और नई हकीकत
कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें 28 अक्तूबर को आश्वासन दिया गया था कि किसी को नहीं निकाला जाएगा,लेकिन अब उन्हें नौकरी से हटाया जा रहा है।विभाग का कहना है कि फाइल तैयार है,लेकिन पांच महीने से कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
विधायकों की सैलरी बढ़ी,कर्मचारियों का रोजगार गया
कर्मचारियों ने विधायकों की बढ़ी हुई सैलरी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब विधायकों और मंत्रियों की पेंशन और वेतन बढ़ाने की बात आती है,तो सरकार फौरन एक्शन लेती है,लेकिन जब कर्मचारियों की रोज़ी-रोटी की बात आती है,तो महीनों फाइलें धूल खाती रहती हैं।
बागवानी विभाग में 500 पद खाली,फिर भी निकाले गए कर्मचारी
आउटसोर्स कर्मचारियों का यह भी कहना है कि बागवानी विभाग में करीब 500 पद खाली पड़े हैं,बावजूद इसके नए टेंडर निकाले जा रहे हैं और पुराने कर्मचारियों को बाहर किया जा रहा है।कर्मचारियों का कहना है कि यह सरासर अन्याय है और वे अपने हक के लिए आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
विधानसभा सत्र खत्म होने के बाद कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की,जहां उन्हें 6 अप्रैल को मिलने के लिए कहा गया।अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।फिलहाल,आउटसोर्स कर्मचारियों में भारी आक्रोश है और आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
