शिमला,संजु चौधरी(TSN)-IGMC सफाई कर्मियों ने ढाई माह से वेतन न मिलने पर अब प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।सफाई कर्मियों ने सोमवार को आईजीएमसी गेट के बाहर काले रिबन बांध कर प्रदर्शन किया।इस दौरान सफाई व्यवस्था पूरी तरह से बंद रही।अब हालात ये हो गए हैं कि सफाई कर्मियों ने काम को ठप करने की चेतावनी दी है।
आईजीएमसी सफाई यूनियन की उपाध्यक्ष अध्यक्ष निशा का कहना है कि अगर अस्पताल मैनेजमेंट का इसी तरह का रवैया रहता है तो सभी एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे।सैलरी के लिए हम कई बार एमएस से बात कर चुके हैं,फिर भी पैसा नहीं मिला।सफाई कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनका दो महीने का वेतन नहीं दिया जाट तो 23 दिसंबर के बाद एक बड़ा आन्दोलन किया जाएगा जिसमें सचिवालय घेराव, डीसी ऑफिस मार्च, रिज पर गांधी प्रतिमा के नीचे धरना शामिल होगा.यही नहीं IGMC में पूरी तरह सफाई व्यवस्था भी ठप की जाएगी.उनका कहना था कि कोरोना काल में जब मरीजों का ख्याल तीमारदार नहीं रख रहे थे तब उन्होंने उनकी सेवा की व उनपर करोना वॉरियर कह कर फूल बरसाएं थे,अब वेतन नहीं दिया जा रहा है।। अब यह बर्दाश्त नहीं होगा और बड़े स्तर पर प्रदर्शन होगा
सीटू के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा का कहना ये
वहीं सीटू के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा का कहना है ठेकेदार न्यूनतम वेतन लागू करने,ईपीएफ,ईएसआई,छुट्टियों,आठ घंटे के कार्य दिवस, हर माह सात तारीख से पूर्व वेतन भुगतान, बोनस, चेंजिंग रूम, दो वर्दी सेट आदि मुद्दों का समाधान नहीं कर रहे हैं। ठेकेदार श्रम कानूनों की खुलकर अवहेलना कर रहे हैं। उन्होंने चेताया है कि अगर श्रम कानून लागू नहीं किए तो आंदोलन उग्र किया जाएगा।
IGMC में सफाई कर्मियों की ऐसे जारी होती है सैलरी
आईजीएमसी के सफाई कर्मी और वार्ड अटेंडेंट को दो कंपनियां सैलरी देती है।अस्पताल में 80 वार्ड अटेंडेंट और 60 सफाई कर्मी है।यह आउटसोर्स कर्मी कंपनी से जब भी सैलरी मांगते हैं तो दोनों कंपनियों का एक ही जवाब आता है कि अभी मैनेजमेंट द्वारा सैलरी जारी नहीं की गई है।लिहाजा स्थिति यह हो गई है कि इन कर्मियों को घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।कर्मचारियों का कहना है कि दिवाली पर सभी को सैलरी मिली थी,लेकिन हम लोगों ने उधार लेकर त्यौहार मनाया। जब सभी कर्मी अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी के साथ निभा रहे हैं तो अस्पताल मैनेजमेंट को देखना चाहिए कि पैसा हर महीने समय से दिया जाए। उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन के इस रवैए की वजह से नौकरी छोड़ने तक की नौबत आ गई है।
