बिलासपुर: शारदीय नवरात्रि के इन पावन दिनों में भक्त माता रानी के 9 अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री रूप की पूजा की जाती है। दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरुप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं। बता दें कि मां ब्रह्मचारिणी ने राजा हिमालय के घर जन्म लिया था। नारदजी की सलाह पर उन्होंने कठोर तप किया, ताकि वे भगवान शिव को पति स्वरूप में प्राप्त कर सकें। कठोर तप के कारण उनका ब्रह्मचारिणी या तपश्चारिणी नाम पड़ा। भगवान शिव की आराधना के दौरान उन्होंने 1000 साल तक केवल फल-फूल खाए तथा 100 साल तक शाक खाकर जीवित रहीं।

जानिए देवी मां ब्रह्मचारिणी की प्रिय वस्तु
मां ब्रह्मचारिणी को गुड़हल, कमल, श्वेत और सुगंधित पुष्प प्रिय हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा को गुड़हल, कमल, श्वेत और सुगंधित पुष्प अर्पित किए जाते हैं।
नवरात्रि हम 9 दिनों तक क्यों मनाते हैं?
नवरात्रि का 9 दिवसीय त्योहार देवी दुर्गा के 9 अवतारों को समर्पित है। दिलचस्प बात यह है कि हर अवतार शक्ति के एक अलग रूप का प्रतिरूप करता है।
देवी मां ब्रह्मचारिणी को क्या पसंद है?
देवी मां ब्रह्मचारिणी को चीनी और मिश्री काफी पसंद है। इसलिए मां को भोग में चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग लगता है। मां को दूध से बने व्यंजनों का भोग भी लगा सकते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी के इस मंत्र का करें जाप
1 – दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु| देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||
वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।
धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥
परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।
पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
2 – या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
3 – दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
4 – ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी.
सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते..
5 – ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रूं ब्रह्मचारिण्यै नम:
