बिलासपुर : सुभाष ठाकुर – विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री नैना देवी इस बरसात में भारी भूस्खलन का शिकार हुआ है । हालांकि यह पहाड़ी पहले ही डेंजर जोन में बताई जा रही है, उस पर इतनी ज्यादा तरीके से भूस्खलन होना किसी खतरे से खाली नहीं है ।हालांकि श्री नैना देवी क्षेत्र का वार्ड नंबर 3, वार्ड नंबर 4, वार्ड नंबर 5 और 6 भूस्खलन का खतरा रहता था, लेकिन इस बार वार्ड नंबर 2 में भी भूस्खलन के कारण स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ा दी है ।
इस भारी बरसात में जहां पर श्री नैना देवी की सड़कों पर भारी भूस्खलन हुआ । आने जाने के सभी रास्ते बंद हो गए थे, वहीं पर श्री नैना देवी मंदिर के समीप नगर परिषद पार्क के पास भी भारी भूस्खलन हुआ है ।यहां पर जो प्रोटेक्शन के लिए डंगा लगाया गया था, वह डंगा हवा में लटकता रह गया । जबकि नीचे से जमीन खिसक गई,अगर इसी प्रकार जमीन की खुदाई होती रही तो आने वाले समय में हालात और बदतर हो जाएंगे । अगर इस पहाड़ी को बचाना है तो किसी भी खुदाई पर तुरंत प्रभाव से रोक लगानी होगी और शहर की पानी की निकासी को भी ठीक करने की भी जरूरत है । पानी की निकासी उचित ना होने के कारण भी श्री नैना देवी में भूस्खलन का खतरा लगातार बढ़ा है । इसके अलावा श्री नैना देवी से लेकर कोलां वाला टोबा तक जगह जगह पहाड़ी गिरी है । इसके अलावा श्री नैना देवी श्मशान घाट के लिए जो रास्ते का निर्माण किया जा रहा था वह भी पूरी तरह से भूस्खलन का शिकार हो गया ।समय-समय पर इस पहाड़ी को लेकर समाजसेवी, राजनीतिक नेता और स्थानीय लोग अपनी आवाज बुलंद करते रहे हैं, लेकिन धरातल पर इस पहाड़ी को बचाने के लिए किसी प्रकार की मुहिम नजर नहीं आई ।
हिमाचल प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन को इस पहाड़ी को बचाने के लिए अभियान शुरू करना चाहिए । इस पहाड़ी पर अब खुदाई बंद होनी चाहिए, ताकि आने वाले समय में यह पहाड़ी भी उत्तराखंड के जोशीमठ जैसे हालात यहां पैदा ना हो जाए और स्थानीय लोगों को यहां से पलायन करने पर मजबूर ना होना पड़े । इसके अलावा मंदिर के समीप इस पहाड़ी पर हालांकि बहुत कम वृक्ष है लेकिन उनमें से भी ज्यादातर वृक्षों को निर्माण कार्यों के चलते बलि चढ़ाया गया है, जिससे इस पहाड़ी पर भूस्खलन का खतरा लगातार बढ़ा है । हालांकि इस पहाड़ी पर जो बचे कूचे वृक्ष है उनकी सुरक्षा के लिए भी जिला प्रशासन को हिमाचल प्रदेश सरकार को अहम निर्णय लेना होगा ।श्री नैना देवी की पहाड़ी पर वृक्ष काटने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना होगा, एक एक वृक्ष को बचाना होगा ताकि भूमि कटाव को रोका जा सके और इस पहाड़ी को भारी भूस्खलन से बचाया जा सके ।
