शिमला/कमल भारद्वाज: नगर निगम शिमला में डीजल घोटाले के सामने आने पर निगम प्रशासन जाग गया है। उन्होंने इस तरह की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरु कर दिया है। जिसके तहत नगर निगम की गाड़ी किस वक्त कहां जा रही है और उसमें कितने रुपए का डीजल डाला गया है ये सब जानकारी रहेगी। इस मामले की जांच नए सिरे से की जा रही। बता दें कि हर महीने 3 लाख तक गड़बड़ी इसमें की जा रही थी।
इस तरह काम करेगा GPS और RFID
GPS (Global Positioning System) लगाकर गाड़ियों की लोकेशन का पता चलेगा। कौन सी गाड़ी कहां जा रही है। कितने किलोमीटर वह चल चुकी है। इसकी पूरी जानकारी नगर निगम के पास होगी। दूसरी तकनीक RFID (Radio Frequency Identification) रिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। जो इससे पहले सिर्फ चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा प्रयोग की जा रही है। इस तकनीक में फ्यूल टंकी और पेट्रोल पंप डिस्पेंसर में रिंग लगाई जाएगी। जितना डीजल डाला गया है उतना ही पैसा दिखाया जाएगा। इस तकनीक को अपनाकर ड्राइवर हेराफेरी नहीं कर सकेगा। डीजल में लाखों रुपए की चपत लगने के बाद नगर निगम शिमला यह तकनीक अपना रहा है। नगर निगम एडिशनल कमिश्नर बीआर शर्मा ने जानकारी दी कि चंडीगढ़ नगर निगम की तर्ज पर शिमला में भी यही सिस्टम गाड़ियों में फिट किया जाएगा। मौजूदा समय में शहर में नगर निगम की 70 छोटी बड़ी गाड़ियां कूड़ा उठाने का काम करती है।
सिर्फ दोषी के खिलाफ होगी कारवाई
एडिशनल कमिश्नर ने बताया कि जब से यह खबर सामने आई है सभी चालक घबरा गए हैं। लेकिन डरने की कोई बात नहीं है। जो वाहन चालक इमानदारी से अपना काम कर रहा है उसे नगर निगम बिल्कुल भी परेशान नहीं करेगा। मामले में जो लोग संलिप्त पाए जाएंगे उन्हीं के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाकी सभी चालक अपना काम बिना किसी परेशानी के करते रहें।
