बिलासपुर, सुभाष-: कृषि विभाग ने जिले के किसानों को मक्की की फसल में लगने वाले हानिकारक कीटों से समय रहते बचाव करने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि यदि कीटों पर शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रण नहीं किया गया तो वे तेजी से पूरी फसल में फैल सकते हैं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका रहती है। इसी उद्देश्य से कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है और खेतों में जाकर आवश्यक तकनीकी सलाह भी प्रदान कर रहा है।
कृषि विभाग के उप निदेशक कुलभूषण धीमान ने बताया कि पिछले कई वर्षों से मक्की की फसल में कीटों का प्रकोप लगातार देखा जा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए विभाग ने फील्ड स्तर पर निगरानी बढ़ा दी है। विभाग की टीमें नियमित रूप से गांवों और खेतों का दौरा कर किसानों को कीटों की पहचान, उनके प्रभाव तथा उचित नियंत्रण उपायों की जानकारी दे रही हैं। जिन क्षेत्रों से कीट लगने की सूचना मिली है, वहां कर्मचारियों को तत्काल भेजकर किसानों को समय पर दवा के प्रयोग के बारे में मार्गदर्शन दिया गया है।उन्होंने किसानों को सलाह दी कि मक्की की फसल में कीट दिखाई देते ही कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित कीटनाशक कोराजिन सुपर 505 का निर्धारित मात्रा में छिड़काव करें। उनके अनुसार शुरुआती अवस्था में किया गया स्प्रे अधिक प्रभावी साबित होता है और कीटों के फैलाव को रोककर फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि समय पर उपचार करने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों सुरक्षित रहते हैं।
उप निदेशक ने बताया कि सदर क्षेत्र सहित जिले के अन्य इलाकों से भी कीट प्रकोप की सूचनाएं प्राप्त हुई थीं। इसके बाद विभाग की फील्ड टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों को मौके पर ही आवश्यक सलाह दी। कर्मचारियों द्वारा किसानों को यह भी समझाया जा रहा है कि फसल की किस अवस्था में कौन-सी दवा का प्रयोग करना चाहिए और उसकी सही मात्रा क्या होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में कीटनाशकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसानों को दवा की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी कीटनाशक का प्रयोग केवल अनुशंसित मात्रा में ही करें। अधिक मात्रा में दवा का उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि वे कृषि विशेषज्ञों तथा अधिकृत विक्रेताओं की सलाह के अनुसार ही दवाइयों का प्रयोग करें, ताकि फसल सुरक्षित रहे, उत्पादन बेहतर हो और भूमि की गुणवत्ता भी लंबे समय तक बनी रहे।
