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Reading: नूरपुर में राज्यस्तरीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की धूम, बेहद प्राचीन हैं मंदिर से जुड़ा इतिहास
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नूरपुर में राज्यस्तरीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की धूम, बेहद प्राचीन हैं मंदिर से जुड़ा इतिहास

admin
admin 4 Min Read
Updated 2023/09/06 at 12:26 PM
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संजीव महाजन,नूरपुर(TSN): हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नूरपुर शहर के प्राचीन श्री बृजराज स्वामी मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा हैं। यहां राज्य स्तरीय जन्माष्टमी महोत्सव मनाया जाता हैं,ऐसे में इस पर्व पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी हैं। इस मंदिर से जुड़ा इतिहास भी काफी विशेष है और यही वजह है कि प्राचीन मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की श्रद्धा का सैलाब उमड़ता हैं।
सीमांत राज्य पंजाब के साथ पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राज मार्ग के प्रवेश द्वार से सटा नूरपुर शहर प्राचीन काल में धमड़ी नाम से जाना जाता था। बेगम नूरजहाँ के यहां आने के बाद शहर का नाम नूरपुर पड़ा। यहां पर राजा जगत सिंह का किला विद्यमान हैं। इस किले के अंदर श्री बृज राज स्वामी ओर काली माता मंदिर हैं।
जानकार बताते हैं कि नूरपुर स्थित श्री बृजराज स्वामी मंदिर संसार में एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां कृष्ण व मीरा की मूर्ति एक साथ विराजमान हैं। रजवाड़ाशाही में दरबार-ए-खास (जहां राजा का दरबार सजता था) और विश्व के हजारों राधा-कृष्ण के मंदिरों में से यही एकमात्र ऐसा मंदिर है, जंहा भगवान श्रीकृष्ण व मीरा की साक्षात मूर्तियां एक साथ स्थापित हैं।
सौंदर्य से परिपूर्ण एक टीलेनुमा जगह पर स्थित यह नगर कभी राजपूत राजाओं की राजधानी हुआ करती थी। इस मंदिर के इतिहास के साथ एक रोचक कथा है कि (1619 से 1623 ई.) नूरपुर के राजा जगत सिंह अपने राज पुरोहित के साथ चित्तौड़गढ़ के राजा के निमंत्रण पर वहां गए। राजा जगत सिंह व उनके राज पुरोहित को रात्रि विश्राम के लिए महल में स्थान दिया गया, उसके साथ में एक मंदिर था, जहां रात के समय राजा को उस मंदिर से घुंघरूओं ओर संगीत की आवाजें सुनाई दी। राजा ने जब मंदिर में झांक कर देखा तो उस कमरे में श्रीकृष्ण जी की मूर्ति के सामने एक उनकी एक अनन्य भक्त भजन गाते हुए नाच रही थी। राजा ने सारी बात अपने राज पुरोहित को सुनाई। राज पुरोहित ने राजा जगत सिंह को घर वापिसी पर राजा (चितौडगढ़) से इन मूर्तियों को उपहार स्वरूप मांग लेने का सुझाव दिया, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण व मीरा की यह मूर्तियां साक्षात हैं।
चितौड़गढ़ के राजा ने भी खुशी-खुशी मूर्तियां व मौलश्री का एक पेड़ राजा जगत सिंह को उपहार स्वरूप दे दिया। इसके बाद नूरपुर के राजा ने अपने दरबार-ए-खास को मंदिर का स्वरूप देकर इन मूर्तियों को वहां पर स्थापित करवा दिया। राज्यस्थानी शैली की काले संगमरमर से बनी भगवान श्रीकृष्ण व अष्टधातु से बनी मीरा की मूर्ति आज भी नूरपुर किले के अंदर ऐतिहासिक श्री बृज राज स्वामी मंदिर में शोभायमान हैं। इसके अतिरिक्त मंदिर की भित्तिकाओं पर राजा द्वारा करवाए गए कृष्ण लीलाओं के चित्रण आज भी दर्शनीय हैं।
यहां पर प्रदेश के श्रद्धालुओं के अलावा सीमांत राज्य पंजाब, हरियाणा व जम्मू-कश्मीर ओर अन्य राज्यों से भी हजारों की संख्या में लोग सारा साल मंदिर में शीश नवाने आते रहते हैं। प्रेम व आस्था के संगम के प्रतीक इस मंदिर का नूर जन्माष्टमी को छलक उठता है जब यहां पर दिन-रात श्रद्धालुओं की भारी भीड़ श्री कृष्ण भगवान ओर मीरा जी के दर्शन करने के लिए उमड़ती हैं। प्रशासन की ओर से इस वर्ष 6 और 7 सितंबर को राज्य स्तरीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन करवाया जा रहा हैं जिसका शुभारंभ 6 सितंबर को भव्य शोभायात्रा से हुआ हैं।
TAGGED: Ancient, celebrated, festival, history, nurpur, shri krishna janmashtami, Temple
admin September 6, 2023
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