नूरपुर, संजीव -: हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनावों के परिणाम सामने आने के बाद नूरपुर क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न पंचायतों से निर्वाचित प्रधान, उपप्रधान और कई कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पूर्व मंत्री राकेश पठानिया के निवास पर पहुंचे। इस दौरान समर्थकों ने एक-दूसरे को जीत की बधाई दी और क्षेत्र के विकास को लेकर अपने विचार साझा किए।पूर्व मंत्री के निवास पर पूरे दिन लोगों का आना-जाना लगा रहा। कई पंचायतों से पहुंचे प्रतिनिधियों और समर्थकों ने चुनावी सफलता का जश्न मनाया। वातावरण में उत्साह देखने को मिला और लोगों ने नव निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों का स्वागत किया। चुनाव जीतकर आए प्रधानों और उपप्रधानों ने कहा कि पंचायत स्तर पर जनता ने विकास और जनसेवा के मुद्दों को प्राथमिकता दी है, जिसके चलते उन्हें समर्थन प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर राकेश पठानिया ने सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और चुनाव परिणाम उसी का प्रतिबिंब हैं।उन्होंने प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बिना किसी भेदभाव के विकास कार्यों को आगे बढ़ाएं तथा ग्रामीण समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। पठानिया ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करना चाहिए।बाद में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने पंचायत चुनावों के दौरान कार्यकर्ताओं द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का योगदान महत्वपूर्ण रहता है और संगठन की मजबूती भी उनकी मेहनत पर निर्भर करती है।उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के विकास, युवाओं के रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और जनहित से जुड़े मुद्दों को आगे भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। उनके अनुसार पंचायत चुनावों के परिणामों ने यह स्पष्ट किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाता विकास और स्थानीय नेतृत्व को महत्व दे रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत चुनावों के बाद नूरपुर में बढ़ी राजनीतिक सक्रियता आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति को नई दिशा दे सकती है। वहीं नव निर्वाचित प्रतिनिधियों का उत्साह और जनता से मिले समर्थन को स्थानीय लोकतंत्र की मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।
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