कानून के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने किया सटीक प्रहार, निर्दोषों को मिलेगी राहत
Mandi, dharamveer-कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश सह-संयोजक सन्नी ईपन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश के गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत दर्ज कई झूठी एफआईआर रद्द करने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय धर्म की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
सन्नी ईपन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल पीड़ित व्यक्ति या उसके करीबी रिश्तेदार ही शिकायत दर्ज करा सकते हैं, कोई तीसरा व्यक्ति नहीं। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति जस्टिस पारदीवाला व जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने यह साफ संदेश दिया है कि अपराध कानून को निर्दोषों को परेशान करने के औजार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।अदालत ने 2022 से 2023 के बीच कथित सामूहिक धर्मांतरण से जुड़ी कई शिकायतों को निरस्त करते हुए माना कि तीसरे पक्ष द्वारा की गई एफआईआर कानून के खिलाफ हैं।
ईपन ने कहा कि जब से भाजपा सत्ता में आई है, तब से अल्पसंख्यकों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज कराए जा रहे हैं, जिससे समाज में विभाजन और अविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश की सरकारों और पुलिस को चेतावनी दी है कि ऐसे मामलों में ईमानदारी और निष्पक्षता से काम लें।सन्नी ईपन ने कहा कि धार्मिक सभा करना गैरकानूनी नहीं है, और यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म बदलना चाहता है तो यह उसका संवैधानिक अधिकार है, जिसे अपराध नहीं ठहराया जा सकता।
