कश्यप ने बताया कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के लगभग 182 आउटसोर्स कर्मचारी फिलहाल नौकरी संकट का सामना कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें पुराने कर्मचारियों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों में से कई पिछले 8 से 12 वर्षों से सेवाएं दे रहे थे, लेकिन अब नई भर्ती में उन्हें शामिल नहीं किया जा रहा, जिससे असंतोष बढ़ा है।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने फिलहाल केवल एक माह की अस्थायी नियुक्ति का निर्णय लिया है, जो प्रशासनिक व तकनीकी शाखाओं में की जाएगी। कश्यप ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह पुराने कर्मचारियों की समस्याओं पर संवेदनशीलता से विचार करे और उनके अनुभव को ध्यान में रखे।
सुरेश कश्यप ने साथ ही कहा कि मुख्यमंत्री ने मंहगाई भत्ते (डीए) में केंद्र की तुलना में कम वृद्धि की है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने 01 जुलाई 2023 से 4 प्रतिशत डीए वृद्धि की थी, जबकि प्रदेश सरकार ने केवल 3 प्रतिशत बढ़ाया। उन्होंने कहा कि यह राज्य कर्मचारियों के साथ अन्याय है और सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
