मंडी: हिमाचल में कई ऐसी जगह हैं जिनके रहस्यों को आज तक कोई नहीं समझ पाया। इनमें अधिकतर धार्मिक जगह है। ऐसा ही एक धार्मिक स्थल हिमाचल के मंडी में स्थित है। जहां एक झील में टापू है जोकि पानी में तैरता रहता है। इस झील का नाम पराशर है। प्रकृति की सुंदरता के दार्शनिक स्थल को देखकर आपका मन रोमांचित हो जाएगा। इस झील की कई खासियतें हैं। इस झील के बीच एक भूभाग है जो अपने आप चलता है और अपनी दिशा बदलता रहता है।
मंडी से 49 किलोमीटर दूर स्थित यह झील ऋषि पराशर को समर्पित है। बताया जाता है कि पैगोडा शैली में इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में मंडी रियासत के राजा बाणसेन ने करवाया था। कहा जाता है कि जिस स्थान पर मंदिर स्थित है वहां ऋषि पराशर ने बरसों पहले तपस्या की थी। समंदर तल से 9 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित पराशर झील के नजारे जन्नत से कम नहीं हैं। सर्दियों में इस झील में बर्फ जम जाती है। पर्यटकों को यहां ठहरने के लिए रेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। प्राकृतिक सौंदर्य के अतिरिक्त झील में तैरता एक भूखंड भी है।
9100 फीट की ऊंचाई पर झील
माना जाता है कि जबसे सृष्टि का निर्माण हुआ तभी यह झील भी बनी। 9,100 फीट की ऊंचाई पर बनी इस झील में पानी कहां से आता है और कहां जाता है किसी को नहीं पता, लेकिन यह पानी ठहरा हुआ भी नहीं है। इस झील के बीच में एक भू-भाग है और यही यहां किसी दैवीय शक्ति के होने का प्रमाण देता है। खास बात यह है कि यह भूभाग एक स्थान पर नहीं रहता बल्कि चलता रहता है। हालांकि अब यह भूभाग कभी कुछ महीनों के लिए एक ही स्थान पर रूक भी जाता है और कभी चलने लग जाता है। इलाके के दर्जनों देवी-देवता इस पवित्र झील के पास आकर स्नान करते हैं।
कोई नहीं जान पाया झील की गहराई
पराशर झील की गहराई को आज दिन तक कोई नहीं नाप सका। हालांकि विज्ञान के लिए यह खोज का विषय हो सकता है लेकिन वैज्ञानिक भी इस स्थान तक पहुंच नहीं पाए हैं। बताया जाता है कि कुछ दशक पूर्व एक विदेशी महिला ऑक्सिजन सिलेंडर के साथ इस झील में गई थी, लेकिन उसके साथ अंग्रेजी में संवाद करने वाला कोई नहीं था जिस कारण यह मालूम नहीं चल सका कि वो झील में कितना नीचे तक गई थी। झील के अंदर क्या रहस्य है इस बात का पता आज दिन तक कोई नहीं लगा सका है।

