कांगड़ा, संजीव-:हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ रोजगारोन्मुखी शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक विद्यार्थियों को विभिन्न व्यावसायिक ट्रेड्स में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे छात्र पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी सीख रहे हैं। जिला कांगड़ा के फतेहपुर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में इस योजना के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
स्कूल में ऑटोमोबाइल ट्रेड के तहत पढ़ रहे विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता और तकनीकी समझ का अनोखा उदाहरण पेश किया है। छात्रों ने कबाड़ और पुराने वाहन के पार्ट्स का उपयोग कर हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की बस, जेसीबी, ट्रैक्टर और क्रेन के मॉडल तैयार किए हैं। इन मॉडलों को बनाने में छात्रों ने पुराने लोहे के टुकड़ों, टूटे पुर्जों और अनुपयोगी सामग्री का इस्तेमाल किया है।छात्रों का कहना है कि वोकेशनल शिक्षा के माध्यम से उन्हें मशीनों और वाहनों के बारे में प्रैक्टिकल ज्ञान मिल रहा है। इससे उन्हें तकनीकी समझ विकसित करने में मदद मिल रही है और भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसर मिलने की संभावना भी बढ़ रही है।
स्कूल प्रबंधन के अनुसार, इस योजना के तहत विद्यार्थियों को सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं बल्कि कार्यशाला में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इससे छात्रों में तकनीकी कौशल विकसित हो रहा है और वे नई-नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।फतेहपुर स्कूल की एक और खास उपलब्धि यह है कि यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके करीब 16 छात्र देश की प्रतिष्ठित ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति में सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा कुछ छात्र तकनीकी ज्ञान के आधार पर अपना स्वयं का कार्य भी शुरू कर चुके हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
ऑटोमोबाइल शिक्षक रविन्द्र सिंह ने बताया कि वोकेशनल शिक्षा के तहत छात्रों को मशीनों और वाहनों से जुड़ा प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही व्यावहारिक अनुभव मिलता है तो उनके लिए आगे रोजगार के अवसर प्राप्त करना आसान हो जाता है।वहीं शिक्षक युद्धबीर सिंह ने कहा कि स्कूल में विद्यार्थियों को नई चीजें सीखने और प्रयोग करने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जाता है। उन्होंने कहा कि कबाड़ सामग्री से तैयार किए गए मॉडल छात्रों की रचनात्मक सोच और तकनीकी समझ को दर्शाते हैं।कुल मिलाकर, वोकेशनल शिक्षा योजना हिमाचल प्रदेश के युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
