भावना शर्मा: हिमाचल कि देवभूमि में बहुत से मंदिर और दैवीय स्थल हैं जिनमें लोगों की अटूट श्रद्धा और आस्था हैं। वैसा ही एक स्थल कांगड़ा जिला के खूबसूरत शहर पालमपुर की ऊंची पहाड़ी पर भी स्थित हैं। यहां शहर के चंदपुर गांव की सबसे ऊंची पहाड़ी पर एक बेहद प्राचीन मंदिर हैं। इस मंदिर को जखणी माता के मंदिर के नाम से जाना जाता हैं।
ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर जहां अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए बेहद प्रसिद्ध हैं। तो वही मां जखणी के चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध हैं। स्थानीय लोगों की माता जखणी में बड़ी ही श्रद्धा और आस्था हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग इस मंदिर में माता रानी के दर्शन के लिए जाते रहते हैं। वहीं बाहर से आने वाले पर्यटक भी यहां की प्राकृतिक सुंदरता के चलते इस स्थान पर जाना नहीं भूलते हैं।
मंदिर के इतिहास की अगर बात की जाए तो बताया जाता हैं कि इस मंदिर में स्थापित माता जखणी की प्रतिमा 450 वर्ष पुरानी हैं। इस प्रतिमा को यहां इस स्थान पर गद्दी जाति के परिवार ने बसाया था जिसके बाद से जखणी माता इस परिवार की कुल देवी भी बन गई। यहां की स्थानीय लोगों का कहना है कि भरमौर से गद्दी जाति के एक परिवार ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था और भरमौर से लाकर देवी मां को इधर बसाया गया था। इसके बाद से यह परिवार खुद भी यहीं पर रहने लगा था। पहले इस स्थान पर एक छोटा सा मंदिर हुआ करता था लेकिन समय के साथ-साथ था अब यहां एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया हैं जो यहां के स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों के लिए भेजें आकर्षण का केंद्र हैं।
इस मंदिर की खास बात यह है कि लोग यहां सड़क मार्ग से अपनी गाड़ी लेकर आसानी से पहुंच सकते हैं। तो वहीं जो लोग और पर्यटक ट्रैकिंग का शौक रखते हैं वह पैदल यात्रा करते हुए भी यहां की खूबसूरत वादियों में प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठाते हुए जखणी माता मंदिर पहुंच सकते हैं।
एक टांग से हीन हैं देवी मां
बताया जाता हैं कि माता जखणी जिनकी प्रतिमा मंदिर में स्थापित है वह एक टांग से हीन हैं। जब कभी मंदिर में देवी मां के गुर में देवी का प्रवेश होता हैं तो वह एक टांग से ही मंदिर की परिक्रमा करता हैं, जिसके चलते यह मान्यता यहां देवी मां से भी जोड़कर देखी जाती हैं। वहीं जिन श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती हैं तो वह भी यहां एक टांग पर मंदिर की परिक्रमा करते हैं।
जख शब्द से पड़ गया जखणी नाम
बताया जाता है कि पहले इस संस्थान का नाम जख था। गद्दी बोली में जख शब्द का प्रयोग देवता के लिए किया जाता हैं। देवी के लिए श्रद्धालुओं में इस जख शब्द से जखणी का रूप लिया हैं। लोगों की इस माता के प्रति गहन आस्था हैं।
