मंडी,धर्मवीर(TSN)-हम पिछले कई दशकों से सुबह अपने दांतों को चमकाने के लिए प्लास्टिक से बने टुथ ब्रश का इस्तेमाल करते हैं और जब यह ब्रश खराब हो जाते हैं तो हम इन्हें फेंक देते हैं। प्लास्टिक से बने यह ब्रश फेंकने के बाद भी सैंकड़ो सालों तक धरती से पूरी तरह से खत्म नहीं होती है।लेकिन बैंबू विलेज ऊना में ऐसा टूथब्रश तैयार किया जा रहा है,जो पूरी तरह से बायोडिग्रवेल है और मिटटी में फेंकने के बाद खाद का रूप ले लेगा। साथ ही यदि आप इस ब्रश को जला देते यह ब्रश राख बन जाएगी। जिससे वायु प्रदूषण भी नहीं होगा।
खराब होने पर यह ब्रश मिटटी में हो जाता है डिकंपोज
बांस से बने इस टूथब्रश के ब्रिसल चावल के रेशे से बनाए गए है, जिन पर चारकोल की पोटिंग की जाती है। इन दिनों यह ब्रश मंडी शहर में लगाए गए गांधी शिल्प बाजार में पहुंच गया और इस ब्रश को जिला ऊना के शिल्पकार अजय कुमार लेकर आएं है। इसके अलावा महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए बांस से बने और भी उत्पाद अजय कुमार बिक्री के लिए लेकर आएं हैं। अजय कुमार ने बताया कि ऊना जिला में प्रशासन और डीआरडीए के सहयोग से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ मिलकर वे बांस से बने उत्पाद बना रहे हैं और इन उत्पादों की खूब बिक्री हो रही है। पिछले साल उनके दिमाम में प्लास्टि के टूथब्रशों की जगह बांस के ब्रश बनाने का आईडिया आया। जिसके बाद उन्होंने यह आईडिया प्रशासन के साथ भी साझा किया। इस ब्रश को बनाने के लिए तत्कालीन उपायुक्त राघव शर्मा ने डीआरडीए के सहयोग से उनके गांव में टूथब्रश बनाने की मशीनरी लगवाई। अजय कुमार बतातें है कि आज वे इस मशीनरी रोजाना 4 हजार के करीब ब्रश बनाकर तैयार कर रहे हैं और इन टूथब्रशों की हिमाचल के साथ साथ बाहरी राज्यों में भी सप्लाई कर रहे हैं।
ऊना जिला के शिल्पकार अजय कुमार ने बनाया यह टूथब्रश
वहीं अजय कुमार ने बताया कि बैंबू आर्ट के लिए ऊना जिला प्रशासन के उनके गांव में साल 2020 में एक कंपनी का निर्माण किया था, जिसे बैंबू विलेज का नाम दिया गया है। इस कंपनी के साथ उनके गांव की 20 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा इसी साल मार्च महीने में उन्होने टूथब्रश बनाना शुरू किया है और अभी तक वे 3 लाख के करीब टूथब्रश सेल कर चुके हैं। वे इस ब्रश को रिटेल रेट पर 50 व होलसेल पर 25 रुपये प्रति ब्रश बेच रहे हैं।
बता दें कि पिछले वर्ष की भांति इस बार भी मंडी शहर के पड्डल मैदान में वस्त्र मंत्रालय की ओर से देश भर के हस्तशिल्पकारों के लिए गांधी शिल्प बाजार प्रदर्शनी एवं बिक्री का आयोजन किया जा रहा है। 1 से 7 अक्तूबर तक चलने वाले इस शिल्प बाजार में पूरे देश भर से 50 के करीब शिल्पकार अपने अपने उत्पाद लेकर पहुंचे हैं।
