शिमला: हिमाचल में वैसे तो कई प्रसिद्ध मंदिर हैं लेकिन हाटू मंदिर पहाड़ी की चोटी पर हरे-भरे पौधों, देवदार और स्प्रूस के पेड़ों से घिरा हुआ है। बता दें कि यह मंदिर 11,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए यह आकर्षण का केंद्र है। इस मंदिर का इतिहास काफी रोचक है। बताया जाता है कि पांडव भाइयों ने अपने समय का कुछ हिस्सा इस हिमालय पर्वत की चोटी पर निवास करके बिताया था। उन्होंने जुआ में कौरवों के साथ अपनी संपत्ति और पत्नी को दांव पर लगाया जिसके बाद वो सबकुछ हार गए और पांडवों को 13 साल के लिए वनवास जाना पड़ा। एक वर्ष की अवधि के लिए अज्ञातवास बिताना पड़ा।
रोचक है मान्यताएं
नारकंडा से करीब 5 किमी की दूरी पर हाटू मंदिर है। जिसके बारे में रावण की पत्नी मंदोदरी को लेकर अनेक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि इसे मंदोदरी ने ही हाटू माता की पूजा के लिए बनवाया था। ऐसा भी कहा जाता है कि रावण की रक्षा के लिए वह यहां आकर पूजा करती थी। यह मंदिर देखने पर अत्यंत आकर्षक लगता है। पूरी तरह लकड़ी से बने होने की वजह से लोग इसे देखकर आश्चर्य में पड़ जाते हैं। शिमला घूमने आने वाले पर्यटक इस मंदिर को देखने जरूर जाते हैं। नारकंडा विशेष रूप से इसी मंदिर के लिए जाना जाता है।

पांडवों ने इस कारण बनवाया था मंदिर
माना जाता है कि यह मंदिर पांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय बनवाया था, जिसका प्रमाण आज भी यहां देखने को मिलता है। कहा जाता है कि यहां पर आज भी अगर खुदाई की जाए तो जला हुआ कोयला मिलता है। दरअसल पांडवों की इस जगह पर एक रसोई भी हुआ करती थी और वे इस जगह पर खाना बनाया करते थे।

हाटू मंदिर की वास्तुकला शिवालय
हाटू मंदिर की वास्तुकला शिवालय है और चीनी ड्रैगन प्रभाव से प्रेरित है। मंदिर की सड़क नारकंडा से विभाजित है और 6 KM लंबी बहुत खड़ी चढ़ाई है। मंदिर तक पहुंचने के लिए खतरनाक ड्राइव या ट्रेक करनी पड़ती है। यह देवदार और स्प्रूस के पेड़ों से भरा है।

