संजीव महाजन, नूरपुर: जसूर से बैजनाथ पपरोला के लिए जल्द ही रेलवे की ओर नियमित रेल सुविधा दी जा सकती है। इसके लिए कांगड़ा घाटी पर रेलगाड़ियों के ट्रायल किए जा रहे है। ट्रायल के बाद ट्रेनों की अब रेगुलर जसूर तक चलने की उम्मीद की जगी है। विभाग की तरफ से पहले पठानकोट बैजनाथ पपरोला रेल मार्ग पर एक ट्रायल इंजन भेजा गया और उसके बाद 7 डिब्बों के साथ एक ट्रायल ट्रेन भी ट्रैक पर चलाई गई है। अब इंतजार है तो बस रेल विभाग की ट्रायल रिपोर्ट का।
बता दें कि पिछले 2 महीने से अधिक समय हो गया है की चक्की पुल बरसात में पानी में बह गया है,जिसके कारण यह ट्रेनें बंद हो गई थी। ट्रेन बंद होने की वजह से लोगों को पठानकोट, जोगिंदर नगर से जाने के लिए भारी परेशानी हो रही है। इस रेलवे पुल को बनने के लिए काफी समय लगा तब तक रेल विभाग ने निर्णय लिया हैकि जब तक रेलवे का यह पुल नहीं बनता तब तक ट्रेन जसूर तक चलाई जाए ।
उत्तर रेलवे फिरोजपुर की डिविजनल रेलवे मैनेजर डीआरएम सीमा शर्मा ने स्वयं भी इसका निरीक्षण किया था और कहा था कि बरसात के बाद मौसम खुलने पर आगामी सप्ताह में रेल यातायात को सुचारू रूप से बहाल करने के लिए रेल विभाग को कड़े निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बैजनाथ पपरोला से नूरपुर तक 3 चरणों पर रेल ट्रायल शुरू कर दिया गया है और यह रेल ट्रायल सफल भी रहा है। अब दो-तीन दिनों तक समूचे रेल ट्रैक का निरीक्षण करवा कर जल्द ही रेलगाड़ियों को बहाल कर दिया जाएगा ताकि किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो। जसूर रेलवे स्टेशन पर गाड़ियों की रिपेयर ओर साफ सफाई के लिए भी रेल विभाग में पूरे तरीके से तैयारी कर ली है और अब वहां से गाड़ियां पूरी तरीके से तैयार होकर चलेगी जैसे पठानकोट से चलती थी।
कांगड़ा घाटी पर चलने वाली यह ट्रेन गरीब लोगों के लिए लाइफ लाइन है जबकि वहां से जितने भी श्रद्धालु ज्वालामुखी, कांगड़ा, चामुंडा इत्यादि मंदिरों में आते है उनके लिए यही एक सस्ता अच्छा आने जाने का साधन था, लेकिन इन ट्रेनों के बंद होने से जहां जनता परेशान है वहीं बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी परेशान है। अब देखना यह है कि कब और कितनी रेलगाड़ियां इस रेल ट्रैक पर जसूर तक दौड़ती है। पहले इस ट्रैक पर 7 रेलगाड़ियां अप ओर 7 गाड़ियां डाउन चलती थी।
