Mandi, Dharamveer-सराज विधानसभा क्षेत्र के शरण गांव में 30 जून की रात आई भयावह बाढ़ और भूस्खलन ने दर्जनों परिवारों की जिंदगी बदल दी। लेकिन इसी आपदा के बीच एक परिवार ऐसा भी था, जिसने अपने साहस और हिम्मत से न केवल अपनी जान बचाई, बल्कि दूसरों को भी प्रेरणा दी। बगस्याड के शरण गांव के भरत राज का परिवार इस त्रासदी का शिकार हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
उस रात गांव के पास वाले नाले में अचानक आई बाढ़ ने तबाही मचा दी। तेज बहाव और भारी मलबे ने गांव के कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया। जब भरत राज के घर के पीछे से मलबा आना शुरू हुआ, तो करीब 20 ग्रामीण इकट्ठा हो गए और जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। इसी दौरान रास्ते में दो जगह लैंडस्लाइड हुआ, जिसमें भरत की बेटी तुनेजा, छोटी बेटी ट्विंकल, मां मंशा देवी, पिता हरि सिंह और एक अन्य महिला राधू देवी मलबे में फंस गए।
भरत राज किसी तरह मलबे से ट्विंकल, मंशा देवी, हरि सिंह और राधू देवी को बाहर निकाल लाए, लेकिन तुनेजा मलबे में दब गई। भरत राज ने बेटी को बचाने की हर कोशिश की, लेकिन तुनेजा मलबे के साथ बहकर थोड़ी दूर तक चली गई थी। छाती तक दबे हाल में उसने एक लकड़ी के टुकड़े को पकड़कर खुद को संभाला और हिम्मत नहीं हारी। सुबह करीब 5 बजे तक मलबे में फंसी रहने के बाद उसने खुद को बाहर निकाला और जंगल की ओर भाग गई।सुबह जब जंगल में बिखरे ग्रामीण और भरत का परिवार आपस में मिला तो सभी ने राहत की सांस ली। इसके बाद वे बगस्याड स्कूल में बने अस्थायी शिविर पहुंचे और अब तक वहीं रह रहे हैं।
सरकार से अपनी शिक्षा का खर्च उठाने की मांग की
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू दोनों ने तुनेजा और भरत के साहस की प्रशंसा की और उन्हें प्रोत्साहित किया। तुनेजा वर्तमान में बीएसई की पढ़ाई कर रही है। आपदा के कारण घर और जीविका सब कुछ खत्म हो गया है। ऐसे में उसने सरकार से अपनी शिक्षा का खर्च उठाने की मांग की है। वहीं, भरत राज और हरि सिंह ने प्रभावितों के स्थायी पुनर्वास की मांग की है।
आपदा का प्रभाव (बगस्याड क्षेत्र में):
- पूरी तरह क्षतिग्रस्त: 27 घर, 3 दुकानें, 28 गौशालाएं
- आंशिक नुकसान: 15 घर, 3 दुकानें, 2 गौशालाएं
- सौभाग्यवश, किसी की जान नहीं गई।
प्रभावितों की आवाज:
- तुनेजा ठाकुर: “सरकार मेरी शिक्षा को जारी रखने में मदद करे।”
- भरत राज: “स्थायी पुनर्वास की दिशा में तत्काल कदम उठाए जाएं।”
- हरि सिंह: “सभी प्रभावित परिवारों को सुरक्षित घर मिले।”
यह आपदा तुनेजा जैसे युवाओं के साहस और जीवटता की मिसाल बनकर सामने आई है। अब जरूरत है कि सरकार ऐसे परिवारों के पुनर्वास और शिक्षा जैसे अहम मुद्दों पर ठोस कदम उठाए।
