Shimla, Sanju –हिमाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने शनिवार को शिमला में हिमाचल प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक की ओर से आयोजित दो दिवसीय नेशनल को-ऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने इसे कोऑपरेटिव जगत का महाकुंभ करार दिया।
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने किया शुभारंभ
कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन रविवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री कृष्ण पाल गुर्जर भी शामिल होंगे।अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सहकारिता आंदोलन की जननी रहा है। वर्ष 1892 में यहां पहली नॉन-कोऑपरेटिव सोसाइटी की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक नगरी शिमला में आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से कोऑपरेटिव क्षेत्र की बड़ी हस्तियां हिस्सा ले रही हैं।
उप मुख्यमंत्री ने इस आयोजन के लिए हिमाचल प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक को बधाई दी और कहा कि इस सम्मेलन से प्रदेश के कोऑपरेटिव सेक्टर को नई ऊर्जा मिलेगी।
बैंकिंग प्रदर्शनी में हाईटेक सुविधाओं की झलक
राजधानी शिमला में सम्मेलन के साथ-साथ बैंकिंग सेक्टर द्वारा एक विशेष प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। इसमें जनता को यह बताया गया कि किस प्रकार सॉफ्टवेयर और तकनीकी माध्यमों से बैंकिंग को और सरल व सुलभ बनाया जा रहा है।
सहायक संचालक देवना महेश्वरी ने बताया कि प्रदेश के सभी सहकारिता बैंकों के प्रतिनिधि यहां पहुंचे हैं। प्रदर्शनी में दिखाया गया कि किस तरह एक अनपढ़ व्यक्ति भी मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी भाषा में बैंक खातों, बकाया राशि, बैंकिंग योजनाओं और अन्य सेवाओं की जानकारी प्राप्त कर सकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बैंकिंग को नई दिशा
कार्यक्रम में प्रतिनिधियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर भी चर्चा की।
संजीव कुमार, सहकारी बैंक प्रतिनिधि ने कहा कि जिस तरह रेलवे में आईआरसीटीसी और दिशा ऐप ने टिकट बुकिंग को आसान बनाया है, उसी तरह बैंकिंग सेवाएं भी अब घर बैठे भाषा के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं।उन्होंने कहा कि अब दफ्तरों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है, लोग घर से ही बैंकिंग जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और शिकायतें भी दर्ज करा सकते हैं।
इसी कड़ी में राकेश कुमार ने बताया कि एआई के उपयोग से धोखाधड़ी की संभावना नहीं रहती, क्योंकि यह केवल वही प्रस्तुत करता है जो मनुष्य उससे करवाना चाहता है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग, जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते, वे भी अब बोलकर अपनी भाषा में बैंकिंग और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
