बिलासपुर : सुभाष ठाकुर (TSN)- प्रदेश सरकार ने शास्त्री पदों की भर्ती नियमाें में बदलाव कर बेरोजगार शास्त्रियों के हितों से कुठाराघात किया है। सरकार के इस निर्णय से न केवल शास्त्री पास बेरोजगारों को रोजगार से वंचित रहना पड़ेगा, बल्कि भविष्य में इससे विश्व की सबसे पुरानी भाषा का अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा। परिधि गृह बिलासपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में हिमाचल प्रदेश बेरोजगार शास्त्री संघ के प्रदेश महामंत्री आचार्य मदन शांडिल्य ने प्रदेश सरकार से संस्कृत व शास्त्री हित में पुराने सी एंड वी नियमों के तहत ही शास्त्री के पदों को भरने की मांग की है।
आचार्य मदन शांडिल्य ने कहा कि नौ सितंबर तक बैचवाइज हुई शास्त्री की भर्ती पुराने सी एंड वी नियमों के तहत हुई है, लेकिन प्रदेश सरकार ने 11 अक्टूबर को अधिसूचना जारी करके भर्ती नियमों में बदलाव कर दिया। नए नियमों के तहत संस्कृत को वैकल्पिक विषय के साथ बीए और एमए करने वाला अभ्यर्थी भी इसके लिए पात्र है।उन्होंने कहा कि शास्त्री पास करने के लिए उन्हाेंने इसके पूरे विषय पढ़े हैं।उन लोगों के पास सरकारी रोजगार प्राप्त करने का एक ही विकल्प है जबकि बीए और एमए करने वाले टीजीटी भी लग सकते हैं।शास्त्री करने वाले ने इसे परंपरागत तरीके से पढ़ा है जबकि वैकल्पित विषय में केवल सूक्ष्म रूप से पढ़ा है। इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री से प्रतिनिधिमंडल मिला था और मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि उनके हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जिस कारण संघ को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
