चंडीगढ़ (एकता): नवरात्रि के 10वें दिन के बाद विजयदशमी मनाई जाती है। दशहरे पर मनाए जाने वाले उत्सवों के महत्व के बारे में आज हम आपको बताते हैं। नवरात्रि के बाद दशहरा का अंतिम यानी दसवां दिन है- विजयदशमी, जिसका मतलब है कि आपने इन तीनों ही गुणों को जीत लिया है, उन पर विजय पा ली है। विजयादशमी बुराई पर अच्छाई की विजय का पावन पर्व है। इस दिन भगवान राम ने रावण का वध करके संसार को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई थी और देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं 10वें दिन के युद्ध के बाद महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है।
शुभ कार्य को करने के लिए विजयादशमी का दिन अच्छा
धार्मिक मान्यता के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए विजयादशमी का दिन अच्छा माना गया है। इस दिन बिना मुहूर्त निकाले कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। इस दिन विभिन्न संस्कार युक्त कार्य जैसे बच्चे का नामकरण, मुंडन, गृहप्रवेश, नए व्यापार या दुकान का उद्घाटन नए वाहन या सामान की खरीद आदि कार्य बिना कोई शुभ मुहूर्त निकलवाए किए जा सकते हैं।
दशहरे के दिन मां दुर्गा और भगवान श्रीराम का होता है पूजन
दशहरा के इस दिन मां दुर्गा और भगवान श्रीराम की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन किए जाने वाले कामों का शुभ फल जरूर मिलता है। कहा जाता है कि शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए इस दिन शस्त्र पूजा करनी चाहिए।

दशहरा और नवरात्रि क्या एक ही है?
भगवान राम ने अपनी पत्नी सीता को वापस पाने के लिए वानर सेना के साथ लक्ष्मण और भगवान हनुमान की सेना के साथ लंका की यात्रा की। भगवान राम ने युद्ध के दसवें दिन रावण का वध किया। इस प्रकार पहले 9 दिनों को नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है और दसवां दिन दशहरा के रूप में मनाया जाता है। भगवान राम ने शक्तिशाली राक्षस, रावण को मारने के लिए देवी दुर्गा माता का आशीर्वाद पाने के लिए एक चंडी-पूजा की थी। श्रीलंका के दस सिर वाले दानव राजा जिन्होंने अपनी बहन सुपर्णखा का बदला लेने के लिए भगवान राम की पत्नी, सीता का अपहरण कर लिया था। तब से जिस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया, वह दशहरा उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा। हिमाचल प्रदेश में, कुल्लू में विजयादशमी उत्सव को राज्य सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय त्योहार का दर्जा दिया गया है।
नौ दिनों तक चलने वाली रामलीला
नवरात्रि के नौ दिनों तक चलने वाली रामलीला लोक-नाटक का एक रूप है। रामलीला का विकास मुख्य तौर पर उत्तर भारत में हुआ था। कहा जाता है कि पहली बार रामलीला का मंचन गोस्वामी तुलसीदास के शिष्यों द्वारा 16वीं सदी में किया गया था। उस समय काशी के राजा ने गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस को पूर्ण करने के बाद रामनगर में रामलीला कराने का संकल्प लिया था। कहा जाता है कि उसी समय से देशभर में रामलीला के नाटक का प्रचलन शुरू हो गया।

