अरविंदर सिंह,हमीरपुर : हमीरपुर जिला के नादान ब्लॉक की 4 पंचायतों में किसानों की गेहूं की फसल पर पीला रतुआ का कहर बरपा हैं। यहां गेहूं की फसल को पिला रतुआ की बीमारी खराब कर रही हैं। इसके चलते हम शुक्रवार को कृषि विभाग कार्यालय हमीरपुर की ओर से गठित पीला रतुआ सर्वेक्षण कमेटी ने इन क्षेत्रों का दौरा किया। टीम ने अपने दौरे के दौरान नादौन ब्लॉक की चार पंचायतो में गेहूं की फसल में पीला रतुआ के लक्षण की पुष्टि हैं।
विभाग की माने तो अभी यह शुरुआती दौर में है जिसकी रोकथाम के बारे में कृषकों को अवगत करवा दिया गया हैं और ब्लॉक स्तर पर दवाइयां भी उपलब्ध करवा दी गई हैं कृषि विभाग की ओर से हर वर्ष गेहूं की फसल के निरीक्षण हेतु टीमें गठित कर विभिन्न गांव का दौरा किया जाता है और पशुओं को लगने वाले बीमारियों पर भी सर्वेक्षण किया जाता हैं।
कृषि विभाग के उपनिदेशक अतुल डोगरा ने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान अधिकारियों ने गांव बाहल, सधवान, लाहड़ कोटलू, सेरा, जसाई, खतरौड़, बल्डूहक, बड़ा, रंगस, रैल और फस्टे में किसानों के खेतों का जायजा किया। इस सर्वेक्षण में गांव बाहल, सधवान, लाहड़़ कोटलू और सेरा में गेहूं की फसल में पीले रतुआ के लक्षण पाए गए। यह लक्षण कुछ स्थानों पर शुरुआती चरण में हैं जहां बीमारी का प्रकोप 2 से 3 प्रतिशत तक हैं। गांव बाहल और सधवान में बीमारी का प्रकोप 5 से 7 प्रतिशत पाया गया हैं। जिले में मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर आने वाले एक-दो हफ्ते में इस बीमारी के फैलने के आसार अधिक होने के कारण किसानों को यह सलाह दी जाती है कि वे इस अवधि के दौरान अपने खेतों में समय-समय पर निगरानी करते रहें।
उपनिदेशक ने कहा कि यदि कहीं इस बीमारी के लक्षण गेहूं के खेत में दिखें तो प्रॉपिकॉनाजोल नामक फफूंद नाशक का एक मिलीलीटर एक लीटर पानी में घोल बनाकर रोग ग्रसित क्षेत्र में छिडक़ाव करें। उन्होंने कहा कि जिले में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को अपनी गेहूं की फसल में 1 लीटर खट्टी लस्सी को 20 लीटर पानी में घोलकर 10 दिन के अंतराल पर छिडक़ाव करने की सलाह दी गई हैं। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग के दफ्तर में संपर्क कर सकते हैं।
