शिमला, संजू-: मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन संबंधित सीटू का एक प्रतिनिधिमंडल पिछले तीन महीनों—मई, जून और जुलाई—के लंबित वेतन तथा एरियर के भुगतान की मांग को लेकर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा विभाग आशीष कोहली से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने वर्कर्स को समय पर पूरा वेतन देने, लंबित एरियर का भुगतान करने और मेडिकल चेकअप सहित अन्य समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।निदेशक आशीष कोहली ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि लंबित वेतन और एरियर का जल्द भुगतान किया जाएगा। इसके साथ ही हर माह समय पर पूरा वेतन देने तथा मेडिकल चेकअप समेत अन्य मुद्दों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल में सीटू जिला कोषाध्यक्ष बालक राम, यूनियन महासचिव शांति देवी, जानकी मेहता, सुनीता, जयवंती, बिमला, सुमन, कविता, रीना, रीता, यशोदा, दलीप और श्रीकांत सहित अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल रहे।सीटू जिला कोषाध्यक्ष बालक राम और यूनियन महासचिव शांति देवी ने कहा कि यदि मिड-डे मील वर्कर्स की मांगों का समाधान नहीं किया गया तो सितंबर माह में आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में करीब 21 हजार बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार करने का कार्य वर्कर्स कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की सिंगल और डबल बेंच द्वारा मिड-डे मील वर्कर्स के पक्ष में फैसला देते हुए 10 महीने के बजाय 12 महीने का वेतन देने की बात कही गई है, लेकिन इस फैसले को अभी तक लागू नहीं किया गया है। वर्कर्स को पूरे साल छुट्टियां नहीं मिलतीं और कई बार तीन-तीन महीने तक वेतन लंबित रहता है।यूनियन नेताओं ने कहा कि मिड-डे मील वर्कर्स की नौकरी से जुड़ी 25 बच्चों की शर्त के कारण बच्चों की संख्या कम होने पर उन्हें नौकरी से हटा दिया जाता है। चुनाव के दौरान पोलिंग पार्टियों के लिए खाना तैयार करने का अतिरिक्त कार्य भी वर्कर्स से लिया जाता है, लेकिन इसके बदले उन्हें अतिरिक्त मानदेय नहीं दिया जाता।
उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद वर्कर्स को ग्रेच्युटी और पेंशन की सुविधा भी नहीं मिलती। साल में तीन बार मेडिकल चेकअप का प्रावधान होने के बावजूद मेडिकल जांच, टेस्ट और आने-जाने का खर्च शिक्षा विभाग द्वारा वहन नहीं किया जाता।
यूनियन ने सरकार से मांग की कि हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार मिड-डे मील वर्कर्स को 10 के बजाय 12 महीने का वेतन दिया जाए। हरियाणा की तर्ज पर 7,000 रुपये मासिक वेतन देने, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तर्ज पर साल में 20 छुट्टियां देने तथा 25 बच्चों की शर्त समाप्त करने की मांग भी उठाई गई।इसके अलावा सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी और पेंशन, मेडिकल चेकअप का पूरा खर्च शिक्षा विभाग द्वारा वहन करने, मिड-डे मील योजना को जमा दो कक्षा तक लागू करने, हर महीने की पहली तारीख को पूरा वेतन एकमुश्त देने और चुनाव के दौरान पोलिंग पार्टियों के लिए खाना बनाने पर अतिरिक्त मानदेय देने की मांग की गई।यूनियन नेताओं ने मिड-डे मील वर्कर्स को नियमित करने के लिए नीति बनाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार ने यदि समय रहते सभी मांगों का समाधान नहीं किया तो सितंबर में आंदोलन को लेकर आगामी रणनीति तय की जाएगी।

