मंडी,धर्मवीर(TSN)-सदियों पुरानी मंडी कलम की दों पेंटिग की नीलामी 3 करोड़ 85 लाख में हुई है।मुंबई पुंडोल्स स्थित नीलामी घर में बीती 15 नवंबर 2024 को कला के कद्रदानों ने इन पेंटिग की इतनी उंची बोली लगाई है।सदियों पुरानी इन पेंटिग को मौजूदा समय में किसी संग्राहलय के अधीन रखा गया था। उस संग्राहलय के माध्यम से ही इन पेंटिंग्स को नीलामी के लिए रखा गया था।एक पेंटिंग 3 करोड़ में तो दूसरी पेंटिंग 85 लाख में नीलाम हुई है।
16वीं सदी में बनी थी 3 करोड़ में बिकने वाली पेंटिंग
मंडी कलम की जो पेंटिंग 3 करोड़ में नीलाम हुई है वो 16वीं सदी में बनाई गई थी।हालांकि इसकी स्पष्ट जानकारी तो नहीं है लेकिन ऐसा बताया जा रहा है कि यह चित्र सन् 1650 से 1660 के बीच का है।इसमें मंडी की राजसी महिलाओं को चित्रित किया गया है। बाएं से पहली महिला ने गोद में बच्चा उठाया है,दुसरी ने हाथ में हुक्का उठाया है और तीसरी महिला रानी प्रतीत हो रही है क्योंकि यह महिला हुक्का भी पी रही है और इसके दाएं हाथ में कमर से पैरों तक लम्बी तलवार भी पकड़ी हुई है। चौथी महिला भी रानी के लिए अपने हाथ में पात्र लिए खड़ी है। सभी ने सुन्दर वस्त्र पहने हैं और आभूषणों से सुसज्जित हैं। इस पेंटिंग में विभिन्न प्राकृतिक रंगों का प्रयोग हुआ है। यह पेंटिंग 3 करोड़ में नीलाम हुई है।
18वीं सदी में बनी पेंटिंग के मिले 85 लाख
मंडी कलम की जिस दूसरी पेंटिंग को 85 लाख में खरीदा गया है वो 18वीं सदी की बताई जा रही है। ऐसा बताया जा रहा है कि वर्ष 1808 में इसे चित्रित किया गया है। यह चित्र मंडी के वर्तमान पैलेस कॉलोनी पर आधारित है। इस चित्र के दाईं ओर गणपति नाला, सिद्ध गणपति मंदिर, पैलेस कॉलोनी से पीछे की पहाड़ीयां, काले बादल, मोर, हिरण, जंगली शुकर, पंछी, हरे-भरे ढेर सारे पेड़ों और खेत भी दर्शाए गए हैं। इसके साथ ही तीन सैनिकों को पहरा देते हुए भी दर्शाया गया है। दो लकड़ी के घर भी दिखाए हैं। यह चित्र 85 लाख में नीलाम हुआ है।
प्राकृतिक रंगों की अदभूत कला है मंडी कलम
मंडी कलम की बात करें तो यह प्राकृतिक रंगों की अदभूत कला है। राजशाही के दौर में कुछ कलाकार ऐसे थे जो प्राकृतिक रंगों और गिलहरी की पूंछ के बालों की तुलीका यानी ब्रश बनाकर बड़ी बारीकि से चित्रों को उकेरते थे। यह चित्र एक तरह से जीवंत प्रतीत होते थे। पहाड़ी चित्रकला के चित्र वेद, पुराणों, रामायण, महाभारत, काव्य, राजाओं-रानियों इत्यादि से सम्बंधित मिलते हैं। पहाड़ी चित्रकला के कलाकारों को उपरोक्त सभी ग्रंथों की अच्छी जानकारी होती थी। मंडी कलम के संरक्षण तथा संवर्धन की बहुत आवश्यकता है। कुछ कलाकार इस क्षेत्र में कार्य कर भी रहे हैं।
