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47 साल की हुई बीएसएल परियोजना, लेकिन 450 विस्थापित आज दिन तक पुर्नवास के इंतजार में

Chandrika
Chandrika 2 Min Read
Updated 2023/07/07 at 9:49 AM
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मंडी :धर्मवीर -बीबीएमबी प्रबंधन भारत का गौरव कही जाने वाली बीएसएल परियोजना का 47वां स्थापना दिवस समारोह मना रहा है। 990 मेगावॉट क्षमता वाली इस परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 1960 में शुरू हुआ था और 1970 में यह प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो गया था। 1977 में यह कमीशंड हुआ। आज इस परियोजना से हिमाचल के अलावा पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्य लाभांवित हो रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिन्होंने अपनी जमीनों की आहूतियां इस परियोजना के लिए दी और खुद विस्थापित हो गए, उनका क्या?

आज भी इस परियोजना के 450 विस्थापित पुर्नवास और पुर्नस्थापना की मांग को लेकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। कुछ तो ऐसे भी हैं जिन्हें इस परियोजना के कारण ऐसा विस्थापित होना पड़ा कि उनके पास एक ईंच भूमि भी शेष नहीं रही और आज वो गैर हिमाचली बनकर रह गए हैं। इन विस्थापितों और प्रभावितों की मांग है कि इन्हें जमीन के बदले जमीन, प्रोजेक्ट में पक्की नौकरी, मुफ्त बिजली-पानी सहित अन्य सुविधाएं दी जाएं।

बीएसएल परियोजना विस्थापितों के लिए 10 बीघा बतौर नोतोड भूमि मिलना तय किया गया था। मगर आज भी 80 प्रतिशत विस्थापितों को भूमि के बदले भूमि नहीं मिल पाई है। पंडोह विस्थापित कल्याण समिति ने प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि उन्हें जमीन के बदले जमीन दी जाए और बीबीएमबी के खाली पदों पर विशेष आरक्षण के तहत इन्हें स्थाई रोजगार प्रदान किया जाए। बिजली पानी की मूलभूत सुविधा प्रदान की जाए। लेकिन बीबीएमबी प्रबंधन प्रोजेक्ट बन जाने के बाद से ही इनकी इन मांगों से पल्ला झाड़कर अपनी डफली अपना राग अलापने में लगा हुआ है।

TAGGED: Mandi Foundation Day of BSL Project
Chandrika July 7, 2023
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