हमीरपुर, अरविंद-: चीड़ के घने जंगलों के लिए पहचाने जाने वाले हमीरपुर जिले में इस वर्ष समय पर हुई बारिश वनों के लिए राहत लेकर आई। अनुकूल मौसम के चलते जंगलों में आग लगने की घटनाओं में पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। लगातार हुई बारिश से जंगलों में नमी बनी रही, जिससे आग तेजी से फैल नहीं सकी और बड़े पैमाने पर वन संपदा को बचाने में मदद मिली।वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस फायर सीजन में जिले में जंगलों में आग लगने के कुल 52 मामले सामने आए। इन घटनाओं से लगभग 512 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ, जबकि करीब 50 लाख रुपये की वन संपदा को नुकसान पहुंचा। विभाग का कहना है कि यदि समय पर बारिश नहीं होती तो आग की घटनाएं अधिक होतीं और नुकसान भी कई गुना बढ़ सकता था।
हमीरपुर वन सर्किल के अरण्यपाल निशांत मंडोत्रा ने बताया कि गर्मी के मौसम में लगभग हर महीने हुई बारिश के कारण जंगलों में पर्याप्त नमी बनी रही। इसका सीधा असर आग की घटनाओं में कमी के रूप में देखने को मिला। उन्होंने कहा कि मौसम की अनुकूल परिस्थितियों के साथ-साथ वन विभाग के कर्मचारियों और वन मित्रों की सतर्कता तथा त्वरित कार्रवाई से भी आग पर समय रहते नियंत्रण पाया गया।उन्होंने बताया कि आग की अधिकांश घटनाओं में विभागीय टीमों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर आग को फैलने से रोका, जिससे बड़े वन क्षेत्र को सुरक्षित रखा जा सका। विभाग भविष्य में भी इसी तरह की तैयारियों को जारी रखने की योजना बना रहा है।
अरण्यपाल निशांत मंडोत्रा ने लोगों से अपील की कि जंगलों में आग लगने की किसी भी घटना की सूचना तुरंत वन विभाग को दें। साथ ही जंगलों में बीड़ी, सिगरेट या अन्य ज्वलनशील वस्तुएं जलती हुई न फेंकें। उन्होंने कहा कि जनसहयोग, जागरूकता और सतर्कता के माध्यम से जंगलों को आग जैसी घटनाओं से काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है। वन विभाग का विश्वास है कि लोगों के सहयोग और समय पर कार्रवाई से आने वाले वर्षों में भी वन संपदा की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
