बिलासपुर (सुभाष ठाकुर): शक्तिपीठ श्री नैना देवी मंदिर में स्थापित प्राचीन चमत्कारी हवन कुंड के जीर्णोद्धार का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। हवन कुंड के जीर्णोद्धार को लेकर मंदिर न्यास के ट्रस्टी पुजारी वर्ग और श्रद्धालुओं ने अपना विरोध जताया है। उनका कहना है कि मंदिर न्यास मंदिर की प्राचीन धरोहरों को हमारी प्राचीन संस्कृति की धरोहरों को संजो कर रखें, ताकि जो इसमें चमत्कार है वह यथावत बरकरार रहे। उनका कहना है कि माताजी का यह हवन यज्ञ शाला एक सिद्ध किया हुआ हवन कुंड है और इसका आज भी चमत्कार देखने को मिलता है।
इस यज्ञशाल की सारी की सारी बुभूती इसी के अंदर समा जाती है इस चमत्कारिक हवन यज्ञ का शेष बाहर निकालने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा जो इसके चार पिलर है वहां पर चारों वेद स्थापित किए गए हैं और एक तरफ यज्ञ रक्षक की स्थापना भी की गई है। उन्होंने कहा कि मंदिर न्यास को इन प्राचीन और चमत्कारिक धरोहरों के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। मंदिर न्यासियों और पुजारी वर्ग का कहना है कि अगर इसके जीर्णोद्धार से इसकी चमत्कार में कोई फर्क पड़ा तो उसका कौन जिम्मेदार होगा। इसके अलावा मंदिर न्यासियों और पुजारियों का यह भी कहना था कि इसकी स्थापना के समय इसके जो पिलर है उसके ऊपर यज्ञ रक्षक की स्थापना भी की गई है। अगर उन पीलरों को हटाया जाता है तो वह मूर्तियां भी खंडित हो जाएगी।
इसके अलावा इसे बनाने में बहुत ही बढ़िया टेक्निक का सहारा उस समय लिया गया है और इसके पिलर इतने बड़े बड़े हैं की आज के कंक्रीट के पिल्लरों से कहीं बेहतर नजर आते हैं और इसके निर्माण में जो सामग्री प्रयोग की गई है। वह इस तरह से प्रयोग की गई है ताकि इसकी छत को किसी प्रकार की हानि न पहुंचे। मंदिर न्यासियों और पुजारियों का कहना है कि इसकी रिपेयर की जानी चाहिए और प्राचीन धर्म संस्कृति विभाग के देखरेख में इसका इसकी पूरी तरह से यथासंभव रिपेयर करनी चाहिए ताकि यह चमत्कारिक हवन कुंड का चमत्कार हमेशा विद्यमान रहे और श्रद्धालुओं की आस्था को किसी प्रकार की ठेस ना पहुंचे।
