राहुल चावला, धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग, संपर्क विभाग, भारतीय शिक्षण मंडल के सहयोग से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020: हिंदी एंव भारतीय भाषाओं के विकास के लिए वरदान विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। पीजी कॉलेज धर्मशाला के सभागार में शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर की ओर से दीप प्रज्वलित कर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया। संगोष्ठी में देश भर से आए शिक्षकों, विद्वानों व शिक्षाविदों की ओर से तीन दिनों तक मंथन किया जाएगा।
राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर ने कहा कि आज़ादी के बाद राजनीतिक श्रेणी ऐसी आई कि हम विश्व गुरु बनाने के बजाए दूसरे देशों की तरफ देखने लगे। गुलामी वाली मानसिकता आज़ादी के बाद भी ऐसे ही जारी रही, लेकिन अब भविष्य में आगे बढ़ने के लिए काम करना है। राज्यपाल ने कहा कि मानसिकता ने भारतीयों को काम करने की बजाए ग़ुलामी करने वाला ही बना दिया है। उन्होंने कहा कि अब नई नीति के तहत जॉब सीकर के बजाय जॉब गिवर बनने वाले भविष्य की युवा पीढ़ी मिलने वाली है। उन्होंने अपने अनुभव सांझा करते हुए हिंदी व अपनी मातृभाषा का महत्व बताया।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि राम ने सोने की लंका जितने के बाद भी राम ने अपनी जन्मभूमि को ही श्रेष्ठ बताया था, लेकिन 1835 से भारत की शिक्षा पद्धति को ही बदलकर रख दिया और मानसिक रूप से गुलाम बनाया गया। उन्होंने कहा कि ग़ुलाम भारत को 96 प्रतिशत शिक्षा दर बताई जाती रही, लेकिन 1947 में मात्र 18 फीसदी थी। उन्होंने कहा कि 185 वर्षों के बाद अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत के असली रूप में लागू की गई है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भारत में मात्र 15 वर्ष के लिए रखी गई थी, लेकिन उसके बाद जबरदस्ती थोपी जा रही है। उन्होंने विभिन्न विषयों के उदाहरण देते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति का महत्व बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) सत प्रकाश बंसल ने की, उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा निति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत के स्वर्णिम इतिहास के बारे में बताते हुए शिक्षा नीति को आज जरूरी बताया। संगोष्ठी के आयोजक समिति के सदस्य डॉ. ओम प्रकाश प्रजापति ने कहा कि संगोष्ठी में देशभर से 200 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे है। इस मौके पर केंद्रीय विवि धर्मशाला सहित अन्य शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
