राहुल चावला, धर्मशाला: जिला प्रशासन कांगड़ा जिला वासियों को सुगम सेवाएं देने के ध्येय के साथ काम में तत्पर है। इसके लिए जिले में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के सदुपयोग और लोक उपयोगी ऐप्स बनाने जैसी पहलों पर फोकस किया जा रहा हैं।यह बात राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर दिल्ली में राष्ट्रपति के हाथों ई-कैच ऐप के विकास के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर धर्मशाला लौटे डीसी कांगड़ा डॉ. निपुण जिंदल शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही।
जिलाधीश एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. निपुण जिंदल को हिमाचल विधानसभा निर्वाचन 2022 में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभिनव पहल और बेहतरीन उपयोग के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया हैं। उन्हें कांगड़ा जिले में चुनाव व्यय निगरानी के डिजिटलीकरण के लिए एप्लिकेशन ई-कैच विकसित करने और उसका बेहतरीन उपयोग तय बनाने के लिए यह सम्मान दिया गया। इस पहल की नवीनता और दक्षता के कारण इसे आईटी क्षेत्र में पूरे भारत में सर्वश्रेष्ठ चुनावी पहल घोषित किया गया हैं।
डॉ. निपुण जिंदल ने इसे लेकर भारत चुनाव आयोग का आभार जताया और कांगड़ा जिले की समस्त जनता और चुनाव प्रक्रिया में सहयोगी रहे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का धन्यवाद करते हुए बधाई दी।
डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि जनता को अधिकतम सहूलियत प्रदान करने में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर दिया जा रहा हैं। जिला प्रशासन की कोशिश है कि इस दिशा में नई पहलें कर लोक सुविधा और सेवा में सुगमता तय बनाई जाए। इसके अलावा प्रशासन ने विभागीय प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए कई आईटी इंटरवेंशन की हैं। जन उपयोग की सेवाओं के लिए भी आईटी की मदद से प्रयास किए गए हैं। पहले भी अपना कांगड़ा ऐप सहित अन्य उपयोगी ऐप्स विकसित की गई हैं। आगे इस दिशा में और बल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोक सेवा में नई ऊंचाइयां हासिल करने के लिए सभी के सहयोग से आगे भी पूरी तत्परता से काम किया जाएगा।
बता दें कि कांगड़ा जिले में चुनावों के बेहतर प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन ने एक अभिनव पहल करते हुए ई-कैच ऐप (कांगड़ा एप्लीकेशन फॉर ट्रैकिंग चुनाव) तैयार की थी। चुनाव व्यय निगरानी के लिए ऐप विकसित करने का यह आइडिया डीसी डॉ. निपुण जिंदल का था। इसे तैयार करने में कांगड़ा जिला एनआईसी के इंजीनियर्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जिलाधीश ने कहा कि ई-कैच ऐप बिना किसी खर्चे के तैयार की गई है। इसमें चुनावों में व्यापक स्तर पर इस्तेमाल की जाने की क्षमता है। संभव है इसे आगे चुनावों में प्रदेश और देश के अन्य जिलों में भी उपयोग में लाया जाए। ऐप पर 270 लॉग इन आईडी थीं, जिनमें हिमाचल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी समेत केंद्रीय पर्यवेक्षक और अन्य चुनावी अधिकारी भी शामिल थे। ताकि वे किसी भी समय व्यय निगरानी टीमों की गतिविधियों की जानकारी पा सकें और जरूरी लगने पर संज्ञान ले सकें। उन्होंने बताया कि इस बार जिले में चूनावों के दौरान 3 करोड़ रुपये कैश और 3 लाख लीटर शराब जब्त की गई। ये पिछली बार के चुनावों के मुकाबले करीब 6 से 7 गुणा अधिक हैं।
