धर्मशाला, कांगड़ा -:धर्मशाला में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में कटोच वंश के प्राचीन इतिहास को लेकर महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। ठाकुर राम सिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी के निदेशक डॉ. चेतराम गर्ग ने कहा कि कटोच वंश का इतिहास लगभग 8 से 9 हजार वर्ष पुराना माना जाता है और इसके संदर्भ महाभारत काल तक मिलते हैं। उन्होंने बताया कि यह वंश केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके संबंध महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से भी जुड़े पाए गए हैं।
यह संगोष्ठी “शौर्य और संघर्ष की गाथा, कटोच वंश और कांगड़ा का इतिहास” विषय पर आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न शोध संस्थानों और कॉलेज के इतिहास विभागों ने संयुक्त रूप से भाग लिया। डॉ. गर्ग ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से इतिहास के नए तथ्य सामने आ रहे हैं, जिन्हें व्यवस्थित रूप से दस्तावेज़ित किया जाएगा। इसके लिए 15 दिनों का समय निर्धारित किया गया है, जिसमें लोककथाओं, कहावतों और प्राचीन ग्रंथों के संदर्भों को भी शामिल किया जाएगा।उन्होंने यह भी बताया कि कुछ स्थानों पर पुराने सिक्कों के मिलने की सूचना है, जिनका वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा ताकि उनके कालखंड का पता लगाया जा सके। डॉ. गर्ग के अनुसार, कांगड़ा का सांस्कृतिक और सामाजिक इतिहास आम लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है, जिससे युवा पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत से परिचित हो सके।उन्होंने यह भी माना कि पिछले कई दशकों में इतिहास लेखन में कुछ कमियां रही हैं, जिन्हें अब सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक इतिहास पर अलग-अलग स्तरों पर शोध कार्य चल रहा है। इस व्यापक कार्य को भविष्य में भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) को सौंपने की योजना है।
TAGGED:
Kangra one day seminar
Chandrika
