संजीव महाजन,नूरपुर: आज के समय में जहां युवा पीढ़ी पारंपरिक खेती और पशुपालन जैसे व्यवसाय से मुंह मोड़ कर नौकरियों की तरफ भाग रही हैं। वहीं इस दौर में कुछ युवा ऐसे भी हैं जो अपने परिवार की ओर से चलाए जा रहे पुश्तैनी काम को ही आगे बढ़ाकर अपने लिए बेहतर रोजगार और आमदनी जुटा रहे हैं। यह युवा अपनी पारंपरिक खेती बाड़ी में ही में ही नए तरीके अपनाकर उसमें बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसे युवा समाज के लिए और युवा पीढ़ी के लिए नई मिसाल पेश कर रहे हैं ऐसी ही एक विशाल जिला कांगड़ा जोड़ी विधानसभा क्षेत्र के तहत घाड़ जरोट गांव के विवेक कुमार ने पेश की हैं।
विकेक की पारिवारिक पृष्ठभूमि किसान परिवार से हैं। उनके पिता सरकारी नौकरी के दौरान भी इस व्यवसाय से जुड़े रहे। वर्ष 2008 में सेवानिवृति के पश्चात उन्होंने खेतीबाड़ी ओर पशुपालन व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। उन्होंने अपने बेटे विवेक को जमा दो की पढ़ाई पूरी करने के उपरांत आईटीआई करवाई,जिसके उपरांत वर्ष 2000 से 2005 तक विवेक कुमार ने परवाणु में निजी क्षेत्र में नौकरी की। उनके पिता ने नौकरी छोड़ कर पुस्तैनी व्यवसाय से जुड़ने को कहा। विवेक ने वर्ष 2006 में अपने पिता जी के साथ कृषि व्यवसाय से जुड़ कर विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
कृषि विभाग से खेतीबाड़ी की उन्नत तकनीकों ओर व्यवसाय चलाने के लिए बताए गए आधुनिक तरीकों को भी अपनाने के साथ समय-समय पर मिलते मार्गदर्शन ओर प्रोत्साहन से विवेक खेतीबाड़ी के कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके पिता जिनका गत वर्ष मई माह में देहांत हो चुका है, की ओर से दिए गए मार्गदर्शन व गुर से विवेक आज 80 कनाल भूमि पर सब्ज़ियों ओर 40 कनाल भूमि पर गेहूं,धान,गन्ना ओर पशुओं के लिए हरे चारे का उत्पादन कर रहे हैं। कृषि विभाग की ओर से उनके खेतों में सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करवाई गई हैं जिससे मौसम पर निर्भरता समाप्त हुई हैं।
वे खेतीबाड़ी में प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दे रहे हैं जिससे खेतीबाड़ी पर कम लागत आ रही है । उन्होंने गत वर्ष प्राकृतिक खेती से सब्जियां उगाने के साथ 15-20 क्विंटल गेहूं पैदा की थी। जिसमें से 10 क्विंटल गेहूं 3500 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बेची है। वे भविष्य में प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाकर अच्छी किस्म के उत्पाद उगा कर मार्किट में बेचने के प्रयास कर रहे हैं।
विवेक कुमार स्वंय स्वावलंबी होने के साथ 10 और लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवा रहे हैं। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अच्छी किस्म की 6 गाय भी पाल रखी हैं जिनसे प्रतिदिन 40-45 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा हैं। जिसमें से 30 लीटर दूध की बिक्री कर रहे हैं, जबकि देसी खाद का अपने खेतों में प्रयोग कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त मांग पर पनीर व दही भी बेचते हैं। विवेक अपने व्यवसाय से सालाना चार से पांच लाख रुपए तक आमदनी कमा रहे हैं।
प्रगतिशील किसान विवेक कुमार का कहना है कि वे खेतों में सीजन के अनुसार गेहूं, धान, मक्की, गन्ना के अतिरिक्त सब्जिओं में गोभी, टमाटर, भिंडी, बैंगन, मूली, शलगम, घीया, तोरी, पालक, धनिया , मटर, चुकंदर की खेती कर रहे हैं। इससे सालाना 3 लाख रुपए तक कमाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि हमारे पुरखों ने गरीबी झेली है लेकिन जमीनें संभाल कर रखी। जिसकी बजह से हम नौकरी की इच्छा न करते हुए आज ज़मीन में ही अपना रोजगार चलाने के साथ 10 अन्य लोगों को रोजगार उपलब्ध करवा रहे हैं। उनका मानना है कि अन्य लोगों को भी कृषि व पशुपालन व्यवसाय से जुड़कर अपनी आमदनी को बढ़ाना चाहिए।
कृषि विषयवाद विशेषज्ञ नगरोटा सूरियां डॉ.राज कुमार भारद्वाज का कहना है कि कृषि विभाग की ओर से किसानों को समय-समय पर बीज,कृषि उपकरण अनुदानित दरों पर उपलब्ध करवाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त खेतों में जाकर मिट्टी की जांच, किसानों की समस्याओं का समाधान करने सहित अन्य तकनीकी जानकारियां उपलब्ध करवाई जाती हैं। यदि किसान को खेत में काम करते हुए चोट लग जाती है तो उस स्थिति में उसे मुख्यमंत्री खेतीहर मजदूर सुरक्षा योजना के तहत 10 हजार से 3 लाख रुपए तक की सहायता भी प्रदान की जाती हैं। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक युवा कृषि व्यवसाय से जुड़ें तथा विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा कर अपनी आमदनी बढ़ाएं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री श सुखविंद्र सिंह सूक्खु की सरकार प्रदेश में कृषि ओर पशुपालन व्यवसाय को लाभकारी बनाने के लिए किसानों को संसाधन और व्यवस्थाएं उपलब्ध करवाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर रही है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इन व्यवसायों से जोड़ कर ग्रामीण आर्थिकी को सुदृढ़ बनाया जा सके।
