अरविंदर सिंह,हमीरपुर(TSN): डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर भवन की छत अब नहीं टपकेगी। लोक निर्माण विभाग के माध्यम से एक करोड़ 36 लाख रुपए से छत को बदलने का काम चल रहा हैं। लोक निर्माण विभाग ने लगभग दो तिहाई काम पूरा कर दिया है जबकि बचा हुआ काम भी जल्द ही पूरा हो जाएगा। छत के बदले जाने के बाद बरसात के मौसम में मरीज के बिस्तर पानी से नहीं भीगेंगे। एक तरफ से कार्य पूरा होने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने गायनी वार्ड का कुछ हिस्सा भी उपरी मंजिल पर शिफ्ट कर दिया हैं। एक तरफ से कार्य पूरा होने के बाद अब दूसरी साइड से छत को बदलने का काम जोरों पर चल रहा हैं।
बता दें कि वर्ष 2019 में मेडिकल कॉलेज की छत को बदलने की कवायद शुरू हुई थी। हालांकि बजट का प्रावधान होने में कुछ समय लग गया ओर बाद में कार्य लोक निर्माण विभाग को सौंपा गया। लोक निर्माण विभाग ने छत बदलने का कार्य शुरू किया ओर वर्तमान में भी कार्य काफी तेज गति से चल रहा हैं। माना जाता है कि आगामी कुछ दिनों में ही छत बदलने का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर की पुरानी छत बुरी तरह से डैमेज हो गई थी। बरसात के दौरान छत से टपक रहे पानी की वजह से मरीजों के बिस्तर भीग जाते थे। सबसे ऊपरी मंजिल पर संचालित होने वाले गायनी वार्ड ओर बच्चों के वार्ड में काफी परेशानियां पेश आ रही थी। यहां छत के टपकने की वजह से दीवारों में भी सीलन थी जिस कारण दीवारें काली पड़ गई थी। ऐसा भी कई बार देखा गया की मजबूरी में मरीज को भीगे हुए बिस्तर पर ही सोना पड़ा। यहां तक की बालकोनी में भी छत से टपका हुआ पानी भर जाने की वजह से यहां चलना दुभर हो जाता था।
मेडिकल सुपरिंटेंडेंट आरकेजीएमसी अनिल वर्मा ने बताया कि एक करोड़ 36 लाख रुपए की लागत से मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भवन की छत को बदला जा रहा हैं। दो तिहाई कार्य लगभग पूरा हो चुका है और बचा हुआ काम भी जल्द ही पूरा हो जाएगा। पुरानी छत बरसात के मौसम में टपक जाती थी जिस कारण परेशानियां पेश आ रही थी। छत बदल जाने के बाद मरीज को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। विदित रहे कि हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए रोजाना सैकड़ो लोग पहुंचते हैं। बीमारी की हालत में मरीजों को वार्डों में भर्ती किया जाता हैं। सबसे ऊपरी मंजिल पर गायनी ओर बच्चों का वार्ड हैं। यहां पर मरीज दिन रात दाखिल रहते हैं।
