नूरपुर:संजीव महाजन (TSN)-देवभूमि हिमाचल में कई प्राचीन धार्मिक स्थल है,जिसमें से एक हजारों साल प्राचीन मन्दिर कोटे वाली माता भी है.यह मन्दिर 12वीं शताब्दी में पृथ्वीराज चौहान के वंश द्वारा राजस्थान कोटा से लाई माता की पिंडी को राजा तालाब के गांव गुरयाल की ऊंची पहाड़ी पर स्थापित गया था.जैसे जैसे इस माता की चर्चा होने लगी वैसे वैसे इस माता के मन्दिर की आस्था भी बढ़ने लगी और हजारों लाखों की संख्या में यहां श्रद्धालु आने लगे और माता से मन्नतें मांगने लगे.सच्चे मन से इस दर पर आकर लोग फरियाद करते है और उनकी मनोकामना माता पूरी करती है ।
पुजारी दलजीत सिंह ने कहा कि यह माता का मन्दिर हजारों साल पुराना है.इस माता की पिंडी को पृथ्वी राज चौहान के वंशज राजस्थान कोटा से राजा का तालाब के गांव गुरयाल की ऊंची पहाड़ी पर लेकर आए और उन्होंने यहां स्थापित किया।यह माता पृथ्वी राज चौहान वंशज की कुल देवी है।जैसे जैसे माता के दर की मान्यता बढ़ने लगी वैसे वैसे श्रद्धालुओं का यहां आना आम हो गया।मन्दिर कमेटी द्वारा यहां हर व्यवस्थाओं का प्रबन्ध किया गया है केशव पठानिया ने कहा कि यह माता पृथ्वी राज चौहान वंशज की कुल देवी है यहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं.माता रानी सबकी मनोकामना पूरी करती है.श्रद्धालु ने कहा कि हम हरियाणा से आए हैं.हमने कोटे वाली माता की बहुत महिमा सुनी हुई थी हम पहली बार यहां माता के दर्शन करने आए हैं हमें बहुत अच्छा लगा ।बुजुर्ग सिमर सिंह ने कहा राजा जब शिकार खेलने आते थे तो वह यहां बकरा देते थे.फिर हमारे गांव के लोग यहां माता के मन्दिर में मन्नत मांगते थे अगर भूल जाते थे तो माता उनके बच्चों को ले जाती थी, जब वह मन्नत की अदायगी कर देते थे तो माता के आशीर्वाद से उनके बच्चें मिल जाते थे.ऐसा ही एक किस्सा गांव लताड़े की लड़की का हुआ था.हम 42 साल से यहां पर रह रहे हैं और गांव वाले भी सेवा कर रहे हैं. माता रानी के चमत्कारों की बात करें तो कई किस्से हैं माता रानी के चमत्कारों के ।
