Hamirpur, Arvind-:हिमाचल प्रदेश में शिक्षा प्रणाली इन दिनों गंभीर प्रशासनिक अव्यवस्था से जूझ रही है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लगभग 900 प्रधानाचार्य पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं, जिससे न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि प्रवक्ता पद पर कार्यरत सैकड़ों शिक्षकों में भी गहरा असंतोष पैदा हो गया है।
हिमाचल प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ ने शिक्षा विभाग की ओर से पदोन्नति सूची जारी न किए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। संघ के अध्यक्ष अजय नेगी ने बताया कि पात्र प्रवक्ता कई वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन विभागीय प्रक्रियाओं में हो रही देरी ने शिक्षकों के मनोबल पर गंभीर प्रभाव डाला है। उन्होंने कहा कि अनेक प्रवक्ता ऐसे भी हैं, जिन्होंने 26–27 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद भी बिना किसी पदोन्नति के सेवानिवृत्ति ले ली, जो कि बेहद चिंता का विषय है।अजय नेगी ने स्पष्ट कहा कि यह मुद्दा केवल प्रवक्ताओं के प्रमोशन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की मजबूती और प्रशासनिक ढांचे से जुड़ा मामला है। प्रधानाचार्य किसी भी विद्यालय की कार्यप्रणाली, अनुशासन, निरीक्षण और शैक्षणिक सुधारों का महत्वपूर्ण केंद्र होता है। इतने बड़े पैमाने पर पद खाली रहने से स्कूलों में निर्णय लेने की क्षमता, शिक्षकों पर निगरानी और शैक्षणिक सुधारों का क्रियान्वयन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
संघ ने विभाग से शीघ्र पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने और रिक्त पदों को भरने की मांग की है। संघ के मीडिया प्रभारी राजन शर्मा ने कहा कि शिक्षा विभाग की लापरवाही से स्कूलों का प्रशासनिक ढांचा कमजोर हो रहा है, जिसे तत्काल दुरुस्त करने की आवश्यकता है। उन्होंने विभाग को चेतावनी दी कि यदि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो संघ बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होगा।
