शिमला-:कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) और हिमाचल प्रदेश हॉर्टिकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कॉरपोरेशन (एचपीएमसी) के संयुक्त तत्वावधान में फागू (शिमला) में “हिमाचल प्रदेश के कृषि-प्रसंस्कृत खाद्य एवं पेय उत्पादों के निर्यात” विषय पर हितधारक सहभागिता कार्यशाला आयोजित की गई।कार्यशाला की अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार की निदेशक मोनिका गौर ने की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एग्रो-प्रोसेसिंग फलों के अंतरराष्ट्रीय निर्यात के लिए नई रणनीति तैयार की गई है, जिससे हिमाचल प्रदेश के जैविक फलों को वैश्विक बाजारों में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने निर्यातोन्मुख अवसंरचना, मूल्य संवर्धन और बाजार संपर्क को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक डी.सी. राणा ने कहा कि किसानों को प्रसंस्करण एवं निर्यात मूल्य श्रृंखला से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को भी प्रोत्साहन दिया जा सकता है। उन्होंने बागवानी उत्पादों की खरीद, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन में एचपीएमसी की भूमिका को रेखांकित किया।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नितिन यादव ने हिमाचल के बागवानी क्षेत्र को वैश्विक बाजारों से जोड़ने और उच्च मूल्य वाले ताजे एवं प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।कार्यशाला में प्लम, आड़ू, खुबानी और चेरी जैसे स्टोन फ्रूट्स तथा उनसे तैयार मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं पर विशेष चर्चा हुई। साथ ही खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, गुणवत्ता प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी मानकों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।प्रतिभागियों ने कोल्ड-चेन अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, फसलोत्तर प्रबंधन और निर्यात सुविधा से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की। विशेषज्ञों ने इसे सरकारी एजेंसियों, निर्यातकों, प्रसंस्करण इकाइयों और किसान संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया।समापन अवसर पर डॉ. तरुण बजाज ने सभी प्रतिभागियों और हितधारकों का आभार व्यक्त करते हुए राज्य में मजबूत निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों की सराहना की।
