धर्मशाला (राहुल चावला)। जिला कांगड़ा में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या के बीच डॉग शेल्टर और एबीसी (Animal Birth Control) सेंटर की कमी सामने आई है। जिले में अभी तक एक भी डॉग शेल्टर धरातल पर तैयार नहीं हो पाया है। हालांकि धर्मशाला और पालमपुर नगर निगम क्षेत्रों में एनजीओ के माध्यम से आवारा कुत्तों की वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन का काम किया जा रहा है।
जिला पशुपालन विभाग की उपनिदेशक डॉ. सीमा गुलेरिया ने बताया कि डॉग शेल्टर और एबीसी सेंटर स्थापित करने की जिम्मेदारी संबंधित नगर पंचायतों और नगर निकायों की है। इन केंद्रों के माध्यम से आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन करवाने की व्यवस्था की जानी है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिले में अभी तक कोई भी डॉग शेल्टर तैयार नहीं हुआ है।
डॉ. गुलेरिया के अनुसार धर्मशाला और पालमपुर में एनजीओ के सहयोग से आवारा कुत्तों की वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन की प्रक्रिया चल रही है, जबकि जिले की अन्य नगर पंचायतों में यह कार्य अभी शुरू नहीं हो पाया है। इससे आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने की व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की सुओ-मोटो रिट पिटीशन के तहत आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नगर निकायों, पशुपालन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और एनिमल वेलफेयर बोर्ड की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। इसके तहत नगर पंचायतों तथा शहरी और ग्रामीण निकायों को आवारा कुत्तों को पकड़कर पशुपालन विभाग के माध्यम से उनकी वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन करवानी होती है।
स्टरलाइजेशन के बाद कुत्तों को निर्धारित अवधि तक शेल्टर में रखने की व्यवस्था भी जरूरी है। हालांकि जिला कांगड़ा में अभी तक यह पूरी व्यवस्था विकसित नहीं हो पाई है। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि जिले में आवारा कुत्तों की संख्या काफी अधिक है और उसके मुकाबले अब तक किया गया वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन का काम पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने बताया कि नगर निकायों की ओर से एबीसी सेंटर स्थापित करने के लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल जिले में कोई भी केंद्र पूरी तरह से धरातल पर नहीं उतर पाया है। इसके चलते आवारा कुत्तों की वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है।
