मंजूर पठान, चंबा: हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है लेकिन हिमाचल का एक ऐसा जिला भी है जो यहां के जंगलों में पाए जाने वाली संपदा के चलते प्रसिद्ध है। जी हां, हम बात कर रहे हैं हिमाचल के चंबा जिला की। चंबा जहां अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के चलते विश्व भर में पहचान बनाए हुए हैं लेकिन अगर हम यह कहें कि यहां के लोगों की आर्थिकी यहां के जंगलों पर निर्भर करती है तो यह आपको कुछ अटपटा जरूर लगेगा लेकिन सच यही है। इसके पीछे की वजह हैं चंबा जिला के जंगलों में मिलने वाली दुर्लभ जड़ी बूटियां।
चंबा के जंगलों में दुर्लभ जड़ी बूटियों की भरमार है और इन्हीं जड़ी बूटियों को एकत्र कर यहां के लोग अपनी आर्थिकी भी चला रहे हैं। यहां वन विभाग के जंगल हर साल लोगों की आर्थिकी का जरिया बनते हैं और लोग यहां जंगलों से जड़ी-बूटी निकालने के बाद करोड़ों रुपए कमाते हैं। इन जंगलों से कोई भी जाकर इन जड़ी-बूटियों को एकत्र नहीं कर सकता है इसके लिए बाकायदा परमिट जारी किया जाता हैं ताकि उसके बाद ग्रामीण इलाकों के बाशिंदे वन विभाग के जंगल से जड़ी बूटियों को निकाल सके। इन जड़ी बूटियों से जहां चंबा जिला के बाशिंदों को आर्थिक लाभ मिल रहा है तो वहीं वन विभाग को भी राजस्व प्राप्त होता है। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की आर्थिकी भी काफी हद तक मजबूत होती है।
चंबा जिला के ग्रामीण इलाकों में लोगों के पास रोजगार का जरिया बेहद कम हैं लेकिन वन विभाग के जंगल ही लोगों की आर्थिकी का जरिया बनते हैं। यहां से बेशकीमती जड़ी-बूटी निकालने के बाद वन विभाग की ओर से वेंडर को परमिट जारी किया जाता है, जिसके बाद वह इन जड़ी-बूटियों को बाजार में बेच सकते हैं। जड़ी बूटियों को निकालने को लेकर भी कुछ नियम तय किए गए हैं। ऐसे में जहां जंगल होगा वहीं के लोग जंगली जड़ी-बूटी निकाल सकते हैं। वन विभाग के डीएफओ अमित शर्मा ने बताया कि ग्रामीण इलाकों की आर्थिकी वन विभाग के जंगलों पर काफी हद तक निर्भर रहती है। यहां से जड़ी-बूटी निकालने के बाद वेंडर के माध्यम से उसे बाजार में बेचा जाता है। उन्होंने बताया कि चंबा में काफी हद तक लोग इसे अपना आर्थिकी का साधन बनाए हुए है।
