राहुल चावला, धर्मशाला: इन दिनों किसानों के खेतों में पीला रतुआ की फसल लगी हैं। वहीं दिसंबर के इस माह में इस फसल पर पिला रतुआ की समस्या देखने को मिलती हैं जिससे किसानों की फसल बर्बाद हो जाती हैं,लेकिन इस बार कृषि विभाग किसानों की इस समस्या का तुरंत समाधान करेगा। किसान परेशान न हों, इसके लिए कृषि विभाग ने कमर कसते हुए टीमें गठित कर ली हैं।
यही नहीं हर वर्ष जहां-जहां पीला रतुआ की समस्या पेश आती है, उन एरिया को कृषि विभाग ने हॉटस्पॉट के रूप में चिंहित किया हैं। जब पीला रतुआ के मामले सामने आते हैं तो सबसे पहले विभाग की टीमें हॉटस्पॉट को ही चेक करती हैं। कृषि विभाग की मानें तो पीला रतुआ जो कि फंगस/फंफूद है, एक राष्ट्रीय समस्या है। जिला कांगड़ा, ऊना व अन्य जिलों में भी यह बीमारी होती है। विभाग की ओर से समय पर किसानों को जागरूक करने के लिए ज्वाइंट टीमें जिला स्तर पर बनाई गईं हैं। इन टीमों में कृषि अधिकारी, राइस एंड व्हीट रिसर्च सेंटर मलां के वैज्ञानिकों को भी शामिल किया गया है।
वरिष्ठ विषयवाद विशेषज्ञ कृषि विभाग डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि गेहूं की फसल में यदि पीले रतुए के लक्षण दिखाई दें तो किसानों को 200 मिली लीटर प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी दवाई प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में मिलाकर साफ मौसम में छिड़काव करना चाहिए। यदि एक छिड़काव का असर हो तो 15 दिन के बाद दूसरा छिड़काव करना चाहिए। दिसंबर के अंत में सामने आने वाली पीला रतुआ की समस्या को देखते हुए विभाग की ओर से पीला रतुआ की बीमारी जहां हर वर्ष आती है, उन्हें हॉटस्पॉट चिंहित किया गया हैं। विभाग ने इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए टीमें भी गठित कर दी हैं।
बीमारी के कण पौधों में करते हैं इंफेक्शन
ज्यादातर दिसंबर अंत में यह पीला रतुआ की बीमारी शुरू होती है। इस समय गेहूं के पौधे निकल आते हैं, खेतों में नमी भी होती हैं। यदि मिट्टी में बीमारी के कण हैं तो वो पौधों में इंफेक्शन कर देते हैं और पत्तों पर हल्दी की तरह का पाउडर आ जाता हैं। किसान इसे आसानी से महसूस कर सकते हैं, यही पीला रतुआ के लक्षण हैं। जहां अच्छी किस्म की गेहूं का बीज बीजा जाता है, वहां इस तरह की समस्या नहीं आती।
यह हैं हॉटस्पॉट
पीला रतुआ को लेकर जिला कांगड़ा में कुछ हॉट स्पॉट चिंहित किए गए हैं, जहां हर साल यह बीमारी आती है। कृषि विभाग की टीम सबसे पहले हॉटस्पॉट को चेक करती है। रैत ब्लाक में बागडू-पुहाड़ा एरिया में पीला रतुआ के लक्षण देखे जा सकते हैं, यदि पुरानी वैरायटी लगी होगी। ज्वालाजी के पास भी बौहण भाटी भी हॉटस्पाट है। देहरा ब्लाक में घलौर चनियारा में हॉटस्पाट है। प्रागपुर में भी कुछ पीला रतुआ के हॉटस्पाट हैं।
