Shimla, Sanju-:हिमाचल प्रदेश में दलितों पर बढ़ते अत्याचार, जातिगत भेदभाव और महिलाओं के खिलाफ लगातार हो रही हिंसा के विरोध में शनिवार को दलित शोषण मुक्ति मंच ने शिमला में ज़िलाधीश कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। मंच के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और प्रदेश में बढ़ती अमानवीय घटनाओं पर तत्काल और कड़े कदम उठाने की मांग की।
मंच के नेता जगत राम ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि प्रदेश में दलितों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं चिंताजनक स्तर पर बढ़ी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रोहड़ू में 12 वर्षीय दलित बच्चे को इतनी प्रताड़ना झेलनी पड़ी कि उसने आत्महत्या जैसा चरम कदम उठा लिया। वहीं कुल्लू जिले की सैंज घाटी में एक महिला से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या तथा हमीरपुर में महिला पर आत्मघाती हमले की वारदात ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।
जगत राम ने कहा कि ये घटनाएं साफ दिखाती हैं कि प्रशासनिक ढांचे में संवेदनशीलता और क़ानून का डरा कमज़ोर पड़ता दिख रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां निजीकरण को बढ़ावा दे रही हैं, जिसका सीधा असर दलित समुदाय की सुरक्षा, अधिकारों और रोज़गार पर पड़ रहा है।
मंच ने कई मांगों को तत्काल लागू करने का आग्रह किया है, जिनमें—
- अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण कानून का सख्ती से पालन
- प्रदेश में आरक्षण रोस्टर को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करना
- सफाई कर्मचारी आयोग का गठन
- और अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करना
शोषण मुक्ति मंच ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो राज्यभर में बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
