Shimla,16 July-हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादकों ने उच्च न्यायालय के आदेशों की आड़ में हो रही पेड़ों की कटाई और घरों से बेदखली के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। हिमाचल सेब उत्पादक संघ की एक आकस्मिक बैठक मंगलवार, 15 जुलाई 2025 को हाटकोटी में आयोजित की गई, जिसमें रोहड़ू, जुब्बल, कोटखाई, नावर, चुहारा और चौपाल क्षेत्रों के प्रभावित किसानों-बागवानों ने भाग लिया।
बैठक में अखिल भारतीय सेब उत्पादक संघ (AFFI) के संस्थापक सदस्य राकेश सिंघा, हिमाचल सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर, सचिव पूरन ठाकुर, राज्य कमेटी सदस्य संजय चौहान समेत कई किसान प्रतिनिधि शामिल हुए।बैठक को संबोधित करते हुए राकेश सिंघा ने सेब बागवानी पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि उच्च न्यायालय के आदेशों की आड़ में प्रदेश सरकार द्वारा सेब के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और बागवानों की जबरन बेदखली पूरी तरह अमानवीय और असंवैधानिक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह कार्रवाई नहीं रोकी गई, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
राकेश सिंघा ने कहा कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था में सेब का अहम योगदान है। इससे लाखों परिवारों को रोजगार मिलता है। यदि इसी तरह पेड़ों को नष्ट किया गया और लोगों को उनकी ज़मीनों से हटाया गया, तो हिमाचल का बागवान कहां जाएगा?”बैठक में विभिन्न क्षेत्रों के किसान प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात रखी और सरकार के रवैये को गरीब विरोधी बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई जीने के अधिकार का उल्लंघन है।
प्रदेश अध्यक्ष सोहन ठाकुर ने बागवानों से एकजुट होने और संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। वहीं, राज्य कमेटी के सदस्य संजय चौहान ने आगामी आंदोलन की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि 29 जुलाई 2025 को हिमाचल प्रदेश सचिवालय का घेराव किया जाएगा।
संजय चौहान ने कहा यह लड़ाई केवल पेड़ों की नहीं, हमारी अस्मिता और आजीविका की है। अगर आज हम नहीं खड़े हुए, तो आने वाली नस्लें भी हमें माफ नहीं करेंगी।”
घोषणा की गई कि हिमाचल प्रदेश किसान सभा और सेब उत्पादक संघ मिलकर इस आंदोलन का नेतृत्व करेंगे और हजारों की संख्या में किसान-बागवानों को लामबंद कर सचिवालय का घेराव करेंगे।संघ ने सभी प्रगतिशील जनसंगठनों, कृषि-बागवानी संगठनों, सामाजिक और व्यापारिक संगठनों से भी इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
