Shimla, 4 January-: हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने राज्य सरकार द्वारा हाल ही में लिए गए फैसलों की कड़ी निंदा की है और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति ने विशेष रूप से लोक सेवा आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की पेंशन में अभूतपूर्व वृद्धि, राजस्व विभाग में सेवानिवृत कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति और मंत्रियों के लिए नई महंगी गाड़ियों की खरीद को असंवैधानिक और पक्षपातपूर्ण करार दिया।
सुरेश ठाकुर, चेयरमैन, ने कहा कि आयोग के चेयरमैन एवं सदस्यों की पेंशन ₹8,000/- और ₹7,500/- से बढ़ाकर क्रमशः ₹48,000/- और ₹45,000/- कर दी गई है, जबकि पेंशनरों की लंबित देनदारियां अभी तक पूरी नहीं की गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वित्तीय संकट का बहाना बनाकर पेंशनरों को उनका वैध हक नहीं दे रही, जबकि अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए मनमाने फैसले ले रही है।
सभी नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर 15 दिनों के भीतर पेंशनरों की मांगों पर शिष्टमंडल के माध्यम से विचार-विमर्श नहीं किया गया, तो समिति विधानसभा और सचिवालय शिमला के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होगी। फरवरी में इसका अगला चरण और व्यापक स्तर पर होगा।
मुख्य मांगों में 2016 से 2022 तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी का भुगतान, महंगाई भत्ते का एरियर, विद्युत बोर्ड और पथ परिवहन निगम पेंशनरों के भुगतान, पुलिस पेंशनरों के बच्चों के लिए नौकरी का कोटा और पूर्व सैनिकों जैसी सुविधा, विश्वविद्यालय पेंशनरों को समय पर पेंशन भुगतान तथा चिकित्सा बिलों के भुगतान के लिए तत्काल ₹15 करोड़ जारी करना शामिल हैं।सुरेश ठाकुर और सैन राम नेगी ने सरकार से आग्रह किया कि वह पेंशनरों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करे और वित्तीय बोझ बढ़ाने वाली मनमानी नीति तुरंत बंद करे।
Chandrika
